दक्षिणपंथियों से मेरी जान को ख़तरा है: काटजू

  • 3 सितंबर 2015
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि उनकी जान को दक्षिणपंथी लोगों से ख़तरा है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, ''जो लोग देश को पिछड़ा रखना चाहते हैं, जो सांप्रदायिकता फैलाना चाहते हैं उन सभी से मेरी जान को ख़तरा है.''

कई मुद्दों पर अक्सर विवादित बयान देकर सुर्खियों में आने वाले जस्टिस काटजू गुरुवार को बीबीसी हिन्दी के स्टूडियो आए थे.

जस्टिस काटजू ने कांग्रेस या भाजपा किसी सरकार को नहीं बख़्शा और दोनों पर जनता को ठगने का आरोप लगाया.

यहां देखें जस्टिस काटजू का गूगल हैंगआउट

उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी दोनों की सरकारें जनता को झांसा दे रही हैं.

उनका कहना था कि फर्ज़ी एनकाउंटर करने वाले पुलिसवालों और ऑनर किलिंग के नाम पर युवाओं को क़त्ल करने वालों को फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए.

'बेबाक बोलने वालों की जान को ख़तरा'

बीबीसी हैंगआउट के दौरान जस्टिस काटजू ने बंगलुरू में जानेमाने शिक्षाविद प्रो. कलबर्गी हत्याकांड की निंदा की.

उन्होंने कहा कि बेझिझक विचार रखने की वजह से उनकी जान को भी ख़तरा है.

उनका कहना था, ''मैंने अपने ब्लॉग पर साफ़-साफ़ लिखा है कि दक्षिणपंथी लोगों से मेरी जान को ख़तरा है.''

वो कहते हैं, ''देखिए एक बात समझ लीजिए सबको एक ही ज़िंदगी मिलती है. मैं इस महीने 69 साल का होने जा रहा हूं और अब मैं किसी से नहीं डरूंगा. जो सच होगा, देश के हित में होगा वही बोलूंगा.''

'कांग्रेस-बीजेपी जनता को ठग रहे'

जस्टिस काटजू कहते हैं कि मनमोहन सरकार और मोदी सरकार में कोई अंतर नहीं और दोनों झांसे की सरकार चला रहे हैं.

उनका कहना था कि ''कांग्रेस की हुकूमत में लाखों-करोड़ों के घोटाले हो रहे थे और लोग उनसे परेशान हो चुके थे. ऐसे में लोकसभा चुनावों के दौरान जब नरेंद्र मोदी ने विकास का नारा दिया तो युवाओं को लगा कि विकास आएगा, उन्हें नौकरी मिलेगी, जो नहीं हुआ.''

उनके अनुसार, ''जिस तरह से कांग्रेस ने जनता को ठगा, भाजपा सरकार भी वही कर रही है.''

सत्याग्रह से आज़ादी नहीं मिली

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महात्मा गांधी को ब्रिटिश एजेंट बताने के उनके बयान के सवाल पर उन्होंने कहा, ''गांधी के बारे में मिथक है. वो 1915 के आसपास भारत लौटे. 33 साल की राजनीति है उनकी.''

उन्होंने बताया, ''उनका काम पढ़िए. हर किताब में वो रामराज, गोरक्षा, वर्णाश्रम की बात करते हैं. हिंदू धार्मिक विचारधारा का प्रचार करते हैं. आप राजनीति में रहकर इस तरह की बातें नहीं कर सकते.''

साथ ही उन्होंने कहा, ''अमरीका को आज़ादी कैसे मिली? क्या उन्होंने अंग्रेज़ों को गुलाब का फूल दिया या फिर सत्याग्रह किया? जॉर्ज वॉशिंगटन को भी उनके ख़िलाफ बंदूक उठानी पड़ी थी. गांधी के अहिंसा के फलसफे से हमको आज भी आज़ादी नहीं मिल पाती.''

'भ्रष्टाचारियों को फांसी हो'

जस्टिस काटजू का मानना है कि भ्रष्टाचारियों को फांसी दी जानी चाहिए.

उन्होंने कहा, ''वैसे तो मैं फांसी की सज़ा के ख़िलाफ हूं लेकिन भ्रष्टाचारियों, दहेज के लिए औरतों को मारने वाले, फर्ज़ी एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मी और ऑनर किलिंग के नाम पर युवाओं का क़त्ल करने वालों को फांसी होनी चाहिए.''

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