मिट्टी, रंगों और कतरनों से बनाई पेंटिंग

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मोना राय भारतीय कला जगत की नामचीन कलाकारों में से एक हैं.

मनोविज्ञान की विद्यार्थी रहीं मोना राय चित्रों और रंगों से कब अपना रचना संसार रंगने लगीं, उन्हें भी पता नहीं चला.

दिल्ली में 1947 में पैदा हुईं मोना ने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर किया. वो आगे चित्रकला की पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहती थीं.

लेकिन माँ ने इजाज़त नहीं दी, इसलिए दिल्ली में ही त्रिवेणी कला संगम में उन्होंने आर्ट क्लास जाना शुरू किया.

मोना अपने चित्रों में मिट्टी, चमकीले पत्थर, पेड़ की छाल या पूजा की रोली, रंगीन धागे, कपड़ों की कतरन, रंगीन सितारे, दैनिक जीवन में काम आने वाली चीजें इस्तेमाल करती हैं.

उनके चित्रों की देश विदेश में कई प्रदर्शनियां लग चुकी हैं. उनके बनाए चित्र नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट (दिल्ली), ललित कला अकादमी, एयर इंडिया, भारत भवन (भोपाल), पंजाब यूनिवर्सिटी म्यूजियम (चंडीगढ़) और कई देश-विदेश के निजी कलेक्शन का हिस्सा हैं.

Image caption मोना मानती हैं कि चित्रकार चित्र बनाते समय किसी भी तरह प्रेरित हो सकता है, वह फिर व्यक्ति, घटना, वस्तु या कोई सुंदर या दुखद दृश्य ही क्यों न हो.
Image caption मोना राय की पेंटिंग्स में गहरे चटकीले रंगों का उपयोग सहज ही ताज़ग़ी व ऊर्जा से भर देता है.
Image caption मोना की चित्र अभिव्यक्ति अद्भुत है. वो मानती हैं कि उनके आसपास का जीवन ही उन्हें चित्र बनाने के लिए प्रेरणा देता है.
Image caption मोना कहती हैं कि उनके दौर के और अब के कला माहौल में बहुत फ़र्क़ है. युवा चित्रकार ज़्यादा सतर्क हैं.
Image caption उन्हें भारतीय त्यौहार बहुत पसंद हैं. विभिन्न त्योहारों के विभिन्न रंग उन्हें बहुत भाते हैं.
Image caption मोना को लगता है कि स्कूली शिक्षा में कला पर ज़ोर दिया जाना चाहिए, जिससे बचपन से ही बच्चों में कला की समझ पैदा हो.
Image caption स्टूडियो को वह कलाकार की रचना प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं.
Image caption उनके कलाकर्म में दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुओं का समावेश उनके चित्रों को और सहज बनाता है.
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Image caption वो कहती हैं कि महिला कलाकारों को अपने चित्रकर्म पर विश्वास होना चाहिए, जिससे वे और मजबूती से अपनी कल्पना को अभिव्यक्त कर सकें.

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