'संघ ने सरकार को कोई एजेंडा नहीं दिया'

  • 4 सितंबर 2015
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय जनता पार्टी के साथ तीन दिन की समन्वय बैठक के आख़िरी दिन इस बात से इनकार किया कि बैठक मोदी सरकार के कामकाज की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी.

आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने शुक्रवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि बैठक में मोदी सरकार के कई मंत्रियों ने हिस्सा लिया लेकिन उन्होंने ऐसी कोई बात साझा नहीं की जिससे उनकी पद और गोपनीयता की शपथ टूटती हो.

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कुछ दिन पहले धार्मिक आधार पर जारी हुए जनगणना के आंकड़ों पर एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि इस विषय पर चर्चा हुई है और संघ इस बारे में अध्ययन करके रिपोर्ट तैयार करेगा जिस पर रांची में अगली बैठक में विमर्श किया जाएगा.

'संघ का एजेंडा'

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क्या मोदी सरकार संघ के एजेंडे को सही तरीके से बढ़ा रही है, इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जबाव में होसबोल ने कहा, ''संघ ने मोदी सरकार को कोई एजेंडा नहीं दिया. मोदी सरकार भारत के लोगों के मन के एजेंडे को लेकर चल रही है.''

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर उन्होंने कहा, ''कौरव-पांडव भी भाई-भाई थे. धर्म की संस्थापना के लिए सब करना पड़ता है.''

भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों की वन रैंक वन पेंशन मांग पर उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को जल्द सुलझा लेगी.

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राम मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ''संघ ने पहले ही कहा कि हिंदू समाज के संत-महात्मा-धर्मात्मा, धर्मसंसद इस विषय को दिशा देते हैं. संघ कार्यक्रम तय नहीं करता. संघ ऐसी डिमांड नहीं करता.''

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