सरकार ने वन रैंक वन पेंशन लागू किया

  • 5 सितंबर 2015
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रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पूर्व सैनिकों की वन रैंक वन पेंशन की मांग मंज़ूर कर ली है.

राजधानी दिल्ली स्थित रक्षा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में रक्षा मंत्री ने कहा कि वन रैंक वन पैंशन का मुद्दा बीते चार दशकों से लंबित था लेकिन किसी सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया.

पूर्व सैनिक असंतुष्ट, जारी रहेगा आंदोलन

मनोहर पर्रिकर ने कहा कि पूर्व सैनिकों की वन रैंक वन पेंशन की मांग पूरा करने के लिए सरकारी खज़ाने से 8000 करोड़ रूपए से ज्यादा राशि खर्च होगी लेकिन भारत सरकार अपने सैनिकों के समर्पण का सम्मान करती है.

वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने मोदी सरकार के इस आरोप को ग़लत बताया है कि पूर्ववर्ती सरकार पूर्व सैनिकों के प्रति उदार नहीं थी.

एके एंटनी ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार ने ही अपने बजट में वन रैंक वन पेंशन को सैद्धांतिक रूप से मंज़ूरी दी थी.

रक्षा मंत्री की प्रमुख बातें

  1. वन रैंक वन पेंशन लागू करने के लिए वर्ष 2013 को आधार वर्ष माना जाएगा.
  2. वन रैंक वन पेंशन की नीति एक जुलाई 2014 से लागू होगी.
  3. वन रैंक वन पेंशन की बक़ाया राशि चार अर्धवार्षिक किश्तों में दी जाएगी.
  4. पूर्व सैनिकों की विधवाओं और युद्ध में मारे गए सैनिकों की विधवाओं को बक़ाया राशि एक मुश्त एक किश्त में दी जाएगी.
  5. इस नीति की पांच साल बाद समीक्षा की जाएगी.
  6. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले सैनिकों को इस नीति का फायदा नहीं मिलेगा.

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