50 दिन के संथारा के बाद 'देह त्यागी'

  • 5 सितंबर 2015
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बीकानेर की 82 वर्षीय बदनी देवी डागा ने 50 दिन के संथारा के बाद शनिवार को अपने निवास पर देह त्यागी.

राजस्थान हाई कोर्ट के संथारा प्रथा पर रोक के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अतंरिक रोक लगा दी था जिसके बाद संथारा का यह पहला मामला है.

जैन महासभा के महामंत्री लूणकरण छाजेड़ ने बीबीसी को बताया, “डागा परिवार में यह दूसरा संथारा है. तीस साल पहले उनकी जेठानी जेसराज ने भी सात दिन के संथारे के बाद अपनी देह त्यागी थी वहीं उनके पड़ोस में रहने वाले तीन अन्य महिलाओं ने भी संथारा लिया था.''

'50 दिन सिर्फ पानी पर'

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लूणकरण छाजेड़ ने बताया, ''बदनी देवी 15 जुलाई से ऑक्सीजन पर थीं और उन्होंने खुद अपना 'अगला भव' सुधारने की इच्छा से संथारा लेना चाहा. वे पचास दिन से सिर्फ पानी पर थीं.”

जैन साधु-संतों ने 25 जुलाई को उन्हें धार्मिक रूप से संकल्प दिलवाया था हालांकि इससे पहले बदनी देवी ने कोई लंबी तपस्या नहीं की थी.

2006 में दायर एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने 10 अगस्त को संथारा को आत्महत्या के समान मानते हुए दंडनीय करार दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर अंतरिम रोक लगाई थी.

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