'महिला अखाड़े' की साध्वी की धर्माचार्यों को चुनौती

  • 7 सितंबर 2015
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Image caption त्रिकाल भवंता का पोस्टर

इस बार के नाशिक सिंहस्थ कुंभ मेले में एक साध्वी, महिलाओं का स्वतंत्र अखाड़ा बनाकर धर्माचार्यों को चुनौती दे रही है और शाही स्नान के लिए अपने हक की लड़ाई लड़ रही है.

महाराष्ट्र के नाशिक-त्र्यंबकेश्वर में जारी कुंभ में 'सर्वेश्वर महादेव बैकुंठ धाम मुक्ति द्वार अखाड़ा परी' की साध्वी त्रिकाल भवंता इलाहाबाद से महिलाओं का अखाड़ा लेकर आई हैं.

परंपरागत 13 अखाड़ों ने उनके शाही स्नान के समय और अलग घाट की मांग का विरोध किया है.

इस विरोध की शुरुआत कुंभ के ध्वजारोहण समारोह में हुई जहां त्रिकाल भवंता ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखनी चाही.

अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने लाखों लोगों के सामने उनके हाथ से माइक छीन लिया. त्रिकाल भवंता ने इसे 'शीलभंग' का प्रयास कहा.

उसके बाद महंत ज्ञानदास को लंबी सफाई देनी पड़ी और प्रशासन ने त्रिकाल भवंता को साधुग्राम में जगह तथा बाकी सुविधाएं मुहैया कराईं.

'पीएचडी हैं' त्रिकाल भवंता

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Image caption त्रिकाल भवंता

50 वर्षीय त्रिकाल भवंता उर्फ अनीता शर्मा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने आयुर्वेदिक औषधियों में पीएचडी कर रखी है.

इलाहाबाद में वे मुसलमान महिलाओं के लिए 'भारतीय राष्ट्रीय विकास परिषद' नामक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाती थीं.

उन्होंने चुनाव भी लड़ा था लेकिन असफल रहीं. वर्ष 2013 में इलाहाबाद के कुंभ में उन्होंने अपने अखाड़े की स्थापना की और पहली महिला शंकराचार्य होने की घोषणा भी की.

अब उनका नाम जगद्गुरु शंकराचार्य त्रिकाल भवंता सरस्वतीजी महाराज है.

वो कहती हैं, "ईश्वर ने हर क्षेत्र में काम करने के बाद मुझे धर्म के क्षेत्र में काम करने का अवसर दिया. इस रास्ते पर जब आई तो महसूस हुआ कि यहां काफी कुछ गलत हो रहा है. तब मैंने ठान लिया कि इसके लिए मुझे ही आगे आना होगा."

'क़ानून करेगा फ़ैसला'

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Image caption कुंभ मेला

त्रिकाल भवंता के बारे में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि भी नपी-तुली बात करते हैं.

वो कहते हैं, "मैं कुंभ में किसी के भी स्नान का विरोध नहीं कर सकता. सवाल सिर्फ समय का है और यह क़ानून के अनुसार होगा."

त्रिकाल भवंता न्यायालय में भी लड़ाई लड़ रही हैं और सात सितंबर को नाशिक के न्यायालय में उनकी मांग पर सुनवाई होने वाली है.

हालांकि, महंत ज्ञानदास महिला अखाड़े को गंभीरता से नहीं लेते.

उनका आरोप है, "वो सफल नहीं होंगी. यह तो उन्होंने महामंडलेश्वर बनाने का एक धंधा बना दिया है. वो धर्म को बेच रही है."

महिलाओं पर अत्याचार

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Image caption कुंभ मेला

अखाड़ों में महिलाओं पर कथित ज़्यादतियों की बात करते हुए त्रिकाल भवंता इसका एक उदाहरण देती हैं.

वे कहती हैं, "मेरे पास एक औरत आई जिसने 40 साल एक गुरु की सेवा में बिताए. वह गुरु किसी पति की तरह उससे व्यवहार करता था. लेकिन गुरु की मृत्यु के बाद गद्दी पर कोई और आ गया और यह महिला अधर में रह गई."

उनका दावा है कि कई महिला महामंडलेश्वरों से उनकी बात हो चुकी है जो उनके पास आने के लिए समय का इंतजार कर रही हैं.

वहीं शिवानी दुर्गा नामक 39 वर्षीय एक और साध्वी ने आरोप लगाया है कि त्रिकाल भवंता ने उन्हें महामंडलेश्वर बनाने के लिए 50 लाख रुपए मांगे थे.

इस पर त्रिकाल भवंता सफ़ाई देते हुए आरोप लगाती हैं, "यह शिवानी दुर्गा की अज्ञानता है. लोभ के कारण वे ऐसी बातें करती हैं. समय आने पर वे समझ जाएंगी."

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