मीरा-भयंदर: मांस की बिक्री पर प्रतिबंध से बवाल

  • 8 सितंबर 2015
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Image caption प्रतिबंध के दौरान किसी भी तरह का मांस नहीं बिक सकेगा.

जैन समुदाय के पर्यूषण पर्व के दौरान मुंबई के उपनगर मीरा-भयंदर में नगर निगम ने आठ दिनों के लिए मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है.

इस प्रतिबंध के दौरान मुर्गे और बकरे समेत किसी भी तरह का मांस नहीं बिक सकेगा.

महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार ने बीफ़ पर पहले से ही पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया था.

मीरा-भयंदर नगर निगम की मेयर इस समय बीजेपी की गीता जैन हैं.

अब मांस के प्रतिबंध को लेकर बीजेपी और उसके सहयोगी दल शिवसेना में मतभेद पैदा हो गया है.

आपत्ति प्रतिबंध की अवधि पर

पिछले सालों में ये प्रतिबंध दो दिन का ही होता था और इस साल वो आठ दिन का होगा.

शिवसेना ने कहा है कि यदि बीजेपी ने ये विवादित प्रस्ताव तुरंत वापस नहीं लिया तो वह गठबंधन तोड़ सकती है.

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Image caption महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार ने कुछ महीने पहले बीफ़ बैन कर दिया था.

साल 2004 में तात्कालीन कांग्रेस–एनसीपी सरकार ने एक आदेश जारी कर पर्यूषण पर्व के पहले तथा आख़री दिन यानी महावीर जयंती पर ऐसी रोक लगाई थी.

गणेश चतुर्थी पर भी राज्यभर में मांस की बिक्री पर रोक लगाई गई थी. पिछले दस सालों के दौरान किसी ने भी इस आदेश का विरोध नहीं किया था.

लेकिन अब पर्यूषण पर्व पर मीरा भयंदर में मांस पर आठ दिनों का प्रतिबंध लगाने के बाद राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं.

मांस व्यापारियों ने भी इस प्रतिबंध का कड़ा विरोध किया है.

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Image caption बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया है.

राजनैतिक विरोध

शिव सेना के विधायक प्रताप सरनाईक ने बीबीसी से कहा, 'भाजपा का यह फ़ैसला सिर्फ़ वोटबैंक की राजनीति है. जैन समुदाय को ख़ुश करने के लिए बाक़ी धर्मों और समुदाय के लोगों पर अत्याचार किया जा रहा है.'

उन्होंने कहा कि भाजपा बहुमत के दम पर मीरा भयंदर नगर निगम में यह निर्णय जनता पर थोपना चाहती है. उन्होंने कहा, "इस प्रस्ताव को तुरंत रद्द कराने के लिए, यदि जरुरत पड़ी तो हम गठबंधन को तोड़ भी सकते हैं."

कांग्रेस ने भी इसका विरोध किया है. प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, "मुंबई नगर निगम के चुनावों के मद्देनज़र यह राजनीती की जा रही है."

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने इस नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन बताते हुए कहा, "भारतीय संविधान में सबको अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है लेकिन दूसरे पर अपने धर्म को थोपने का नहीं. यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को आम लोगों पर थोपने की सज़िश है.”

ग़रीब दुकानदारों पर असर

बॉम्बे बीफ़ ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद अली कुरैशी के अनुसार इससे मांस व्यापार में लगे ग़रीब लोगों को दिक़्क़त होगी.

उन्होंने कहा, "ज्यादातर ग़रीब लोग मांस बेचते हैं जो रोज़ कमाकर खाते हैं. आठ दिनों के लिए रोज़ी-रोटी बंद होने से उनके परिवारों को दिक़्क़तें होंगी."

उन्होंने कहा, "मीरा भयंदर में रहनेवाले जैन समुदाय के ज़्यादातर लोग सोने-चांदी के अमीर व्यापारी हैं. यदि वह हमारी दुकानें आठ दिन तक बंद रखना चाहते हैं तो अपनी दुकानें भी उतने ही समय के लिए बंद रखें."

वहीं भाजपा की मेयर गीता जैन का कहना है कि उनकी पार्टी कई सालों से ये प्रस्ताव लाती रही थी. अब बहुमत में है, इसलिए ये प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है.

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