चीन की मुश्किलों का फ़ायदा उठाने पर ज़ोर

  • 8 सितंबर 2015
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रमुख बैंकरों, उद्योगपतियों और व्यवसायियों के साथ एक बैठक में कहा है कि वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव भारत के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को और मज़बूत करने का एक अवसर है.

अपने सरकारी निवास पर दो घंटे चली इस मुलाक़ात के दौरान चर्चा का ज़ोर इस बात पर था कि चीन और दूसरे देशों में आर्थिक कठिनाइयों का फ़ायदा उठाने के लिए भारत को क्या क़दम उठाना चाहिए.

मंगलवार को हुई इस बैठक का मक़सद भारत की अर्थव्यवस्था का जायज़ा लेना था.

लगभग चालीस उद्योगपति और व्यापारी बैठक में शामिल हुए थे जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी भी शामिल थे.

दो सुझाव

अगर उद्योगपतियों ने प्रधानमंत्री को कुछ सुझाव दिए, तो प्रधानमंत्री ने भी उद्योगपतियों से ठोस क़दम उठाने को कहा.

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Image caption चीन की आर्थिक हालत को लेकर दुनिया भर में चिंता है

बैठक में शामिल उद्योगपतियों और व्यापारियों ने प्रधानमंत्री को दो प्रमुख सुझाव दिए.

वित्त मंत्री अरुण जेटली के अनुसार पहला सुझाव था दिवालियेपन का फ़ैसला करने वाली अदालत (बैंकरप्सी कोर्ट) की स्थापना और दूसरी सलाह थी भ्रष्टाचार रोकथाम विधेयक में भ्रष्टाचार की परिभाषा को शामिल करना.

इस मुलाक़ात के बाद भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष सुमित मजूमदार ने पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री ने बैठक में उनसे क्या कहा, "आप लोगों ने हमें जो बताया उसके लिए धन्यवाद. हम आपके सुझावों पर विचार करेंगे. उन्होंने उद्योगपतियों से कहा कि आप भी थोड़ा जोखिम लो और देश में निवेश करो."

पिछले कुछ हफ़्तों में देश के बड़े उद्योगपतियों के साथ प्रधानमंत्री की ये दूसरी बैठक थी.

'भारत मज़बूत स्थिति में'

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Image caption भारतीय शेयर बाज़ार भी हाल के दिनों में उथल पुथल का शिकार हुआ है

इस बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली और भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन भी शामिल थे.

बैठक के ख़त्म होने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, "प्रधानमंत्री ने बातचीत के अंत में मानव संसाधन और घरेलू बाज़ारों के आकार की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि भारत मज़बूत स्थिति में है."

अरुण जेटली के अनुसार प्रधानमंत्री ने रोज़गार बढ़ाने वाले क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने पर ज़ोर दिया.

जेटली के मुताबिक़ प्रधानमंत्री इस बात से संतुष्ट थे कि शेयर बाज़ारों को छोड़ कर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का भारत की अर्थव्यवस्था पर कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ा.

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