13वें माले से क्यों साड़ी का सहारा ले भागना पड़ा

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नोएडा के अपने घर में मेरी पत्नी और मेरे बेटे के लिए हर शाम की तरह ये भी एक शाम थी. नोएडा के इस अपार्टमेंट में हम छह हफ़्ते पहले ही शिफ़्ट हुए हैं और अपार्टमेंट के 12वें माले पर रह रहे हैं.

मैं दफ़्तर से घर जा रहा था. मेरा बेटा घर के बीचोबीच रखे डाइनिंग टेबल पर अपना होमवर्क कर रहा था. वहां से ड्राइंग रुम और किचन को देखा जा सकता है.

उस समय रात के क़रीब 9.30 बजे थे तभी अचानक दरवाज़े पर दस्तक सुनाई दी. दस्तक घर के मेन दरवाज़े पर नहीं बल्कि किचन की बालकनी के दरवाज़े पर दी जा रही थी.

मेरी पत्नी और बच्चा तब तक ये समझ पाते कि दस्तक कहां से आ रही है दरवाज़ा खटखटाने की गति और तेज़ हो गई और जैसे ही मेरी पत्नी और बच्चे ने वहां देखा वो अचंभित होने के साथ-साथ घबरा गए.

क़रीब 13 से 14 साल की लड़की हमारी किचन की बॉलकनी में थी. बॉलकनी से लटकी एक सूती साड़ी देखी जा सकती थी.

दरवाज़े पर दस्तक

वो दरवाज़ा खोलने को कह रही थी. बहुत ही सहमी हुई मेरी पत्नी ने किचन से ही पूछा क्या हुआ है?

इस लड़की ने बताया कि वो ऊपर के माले से आई है और अपने मालिक के अत्याचार से बचने के लिए उसने ये क़दम उठाया है.

मेरी पत्नी ने दरवाज़ा खोलने के बजाए अपार्टमेंट के सुरक्षागार्ड के दफ़्तर में फ़ोन किया लेकिन किसी ने फ़ोन नहीं उठाया. उधर लड़की लगातार दरवाज़ा पीट रही थी.

उस लड़की ने धमकी तक दे दी कि अगर उसे अंदर आने नहीं दिया गया तो वो बॉलकनी से कूद जाएगी.

मेरी पत्नी ने मेरे बेटे से तुरंत पड़ोसियों और सुरक्षाकर्मी को बुलाने को कहा और इस बीच लड़की को बातों में उलझाए रखा. धारियों वाली टी-शर्ट पहने ये लड़की बोले जा रही थी कि ''वो मुझे मारते हैं, मैं यहां नहीं रहना चाहती. मुझे बचा लो.'' लेकिन वो रो नहीं रही थी.

पड़ोसियों और सुरक्षाकर्मियों के आने के बाद किचन की बालकनी का दरवाज़ा खोला गया. जैसे ही दरवाज़ा खुला तो लड़की ने बचकर भागने की कोशिश की. लेकिन बाद में उसे शांत कर लिया गया और पूरा मामला पूछा गया.

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उस लड़की ने बताया कि वो जिस घर में काम करती है उस घर के लोगों का बर्ताव ठीक नहीं है और उसने सब लोगों से भागने की अनुमति मांगी. देर रात हो चली थी और इस लड़की को अकेले छोड़ना हम सब लोगों ने मुनासिब नहीं समझा.

इस बीच जिस घर में ये लड़की काम करती थी उन्होंने भी जान लिया था कि लड़की भाग गई है और शोर सुन कर आ गए.

पुलिस

उन लोगों ने इस लड़की पर आरोप लगाया कि उसे भागने की आदत है और दो दिन पहले वो एक मज़दूर के साथ भाग गई थी. इस बीच परिवार में से ही एक महिला आई और उसे ले गई.

इस बीच मैं ऑफ़िस से घर पहुंच चुका था. मैंने सारा क़िस्सा सुना और वाट्स ऐप पर अपार्टमेंट के लोगों को इस घटना की जानकारी दी. सोसाइटी के लोग इस बात को समझ गए थे कि ये लड़की नाबालिग़ है. उस परिवार की तरफ़ से दी गई दलील के बावजूद हमने पुलिस को बुलाया.

लड़की ने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी. लड़की ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में रहने वाले अपने परिवारवालों का नंबर दिया और पुलिस ने फ़ोन पर पूरी जानकारी जुटाई. लड़की जहां काम करती थी वो लोग भी उसी जगह के रहने वाले थे.

उस रात इस लड़की को उसी अपार्टमेंट में किसी और परिवार के साथ छोड़ा गया.

अगली सुबह पुलिस ने इस लड़की को एक स्वंय सेवी संस्था के हवाले किया जो उसके परिवार के संपर्क में हैं. वो अनचाहा मेहमान तो अब सुरक्षित है लेकिन मेरे तीन लोगों के परिवार ख़ासकर मेरे बेटे के लिए सबसे बड़ी चुनौती है बालकनी की तरफ़ से अपना ध्यान हटाना जहां हर पांच मिनट में उसकी नज़र चली जाती है.

डर और घबराहट के कारण मेरे बेटे ने उस घटना के बाद से शायद एक वक़्त का भी खाना ठीक से नहीं खाया है.

उस लड़की के शब्द ''मुझे बचाओ, मुझे बचाओ'' हमारे कानों में अब भी गूंज रहे हैं.

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