लालू जी ने किसी वर्ग को गाली नहीं दी: नीतीश

  • 11 सितंबर 2015
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बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि गठबंधन ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार चुना है और अब ये बिहार की जनता को तय करना है.

नीतीश कुमार से ये पूछा गया था कि अगर राष्ट्रीय जनता दल को चुनाव में ज़्यादा सीटें आईं, तो क्या होगा.

बीबीसी हिंदी के साथ ट्विटर चैट #AskNitish पर नीतीश कुमार ने कई सवालों के दिए.

यह पूछे जाने पर कि अगर लालू की पार्टी को अधिक सीटें मिली तो क्या वे आपको मुख्यमंत्री बनने देंगे, नीतीश ने कहा, "गठबंधन ने मुझे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुना है. अब फैसला बिहार की जनता को करना है."

एक यूजर @mihirjha94 के सवाल पर कि लालू यादव लगातार अगड़ों को गालियाँ दे रहे हैं, नीतीश ने कहा, "जहाँ तक मेरी जानकारी है लालू जी ने किसी वर्ग के लिए गाली जैसे शब्द का प्रयोग नहीं किया है."

अन्य सभी राजनीतिक दल और व्यक्तियों की तरह लालू जी के बेटे की भूमिका भी बिहार की जनता आने वाले चुनावों में तय करेगी.

दलितों को न्याय मिला?

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जातीय हिंसा के मामलों में दलितों को अभी तक न्याय का इंतज़ार क्यों है? इस सवाल के जवाब में नीतीश ने कहा, "पिछले दस वर्षों में हर वर्ग को त्वरित न्याय मिले इसके लिए मेरी सरकार ने कई प्रयास किए हैं. इसके कुछ अच्छे परिणाम भी जनता के सामने हैं."

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) स्वतंत्र पार्टी है, किसी गठबंधन का हिस्सा बनना या न बनना उनका निर्णय है.

बिहार से लोगों के पलायन को कैसे रोकेंगे? इस सवाल के जवाब ने नीतीश ने कहा, "पिछले 10 साल में बिहार से पलायन में कमी आई है. विश्वास है कि अगर बिहार विकास के पथ पर ऐसे ही बढ़ता रहेगा, तो पलायन में भी कमी आएगी."

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नीतीश ने कहा कि महागठबंधन के पीछे की प्रेरणा और उसका उद्देश्य बिहार के हित को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया है.

राजनीतिक अवसरवादिता?

बीबीसी के सवाल कि आप राजनीति में अवसरवाद को उचित मानते हैं, नीतीश ने जवाब दिया, "राजनीति में अवसरवादिता की परिभाषा पर लोगों के नज़रिए अलग-अलग हो सकते हैं."

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नीतीश ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के सभी निर्णयों में जनता के हित को सर्वोपरि रखने की कोशिश की है.

क्या असदउद्दीन ओवैसी से डरते हैं? नीतीश ने सीधा जवाब नहीं देते हुए कहा, "मेरे लिए बिहार की जनता का आशीर्वाद और समर्थन ही मायने रखते हैं."

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