बागपत 'रेप': बहनों के ख़िलाफ़ ही मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के बागपत में खाप पंचायत के ‘बलात्कार’ के कथित फ़रमान के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुंची दो दलित बहनों के मामले में एक नया मोड़ आ गया है.

अब इन बहनों, उनके एक भाई और परिवार के कई सदस्यों के ख़िलाफ़ ही बलात्कार का मामला दर्ज कर दिया गया है.

इससे पहले इन बहनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ये आरोप लाया था कि बागपत के संकरौद गांव की पंचायत ने उनका बलात्कार किए जाने का फ़रमान जारी किया.

अदालत में बहनों ने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इन बहनों का एक भाई 'ऊंची' जाति की एक महिला के साथ भाग गया था.

लेकिन स्थानीय पुलिस और अधिकारी इस आरोप को सिरे से ख़ारिज कर रहे हैं. उनका कहना है कि पंचायत की ओर से ऐसा कोई आदेश दिया ही नहीं गया है.

बीबीसी की टीम भी जब कुछ दिनों पहले उस गांव में गई थी, तो उसे पंचायत के इस तरह के फ़रमान की पुष्टि नहीं हो सकी थी.

अब 'ऊंची' जाति की उसी महिला ने ही बहनों, उनके भाई और परिवार के कई सदस्यों के ख़िलाफ़ बलात्कार की शिकायत की है.

बागपत के एसपी, शरद सचान ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “लड़की अपनी शिकायत लेकर ज़िला अदालत गई और वहां से आदेश हुआ कि पुलिस बलात्कार की शिकायत दर्ज करे, तो हमने एफ़आईआर दर्ज कर ली है.”

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कोर्ट ने कार्रवाई पर लगाई रोक

पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने जब ये जानकारी आई, तो उन्होंने दलित बहनों के पूरे परिवार के ख़िलाफ़ कोई भी कार्रवाई करने पर रोक लगा दी.

बहनों के वकील राहुल त्यागी ने बीबीसी को बताया, “कोर्ट ने रोक लगाते हुए कहा कि बहनों के परिवार को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश होना होगा, और उसके बाद ही कोई फ़ैसला लिया जाएगा.”

त्यागी के मुताबिक़ कोर्ट में मेरठ पुलिस के एक सीनियर इंस्पेक्टर ने ऐफ़िडेविट देकर ये बताया, कि ऊंची जाति की लड़की और बहनों के भाई अपनी मर्ज़ी से भागे थे.

उन्होंने कहा, "ऊंची जाति की लड़की ने बलात्कार की शिकायत दबाव में आकर की है."

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भाई जेल में

18 अगस्त को इन बहनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी कि उन्हें और ऊंची जाति की लड़की को सुरक्षा मुहैया करवाई जाए और पूरे मामले की सीबीआई जांच हो.

याचिका दायर किए जाने से पहले ही बहनों के भाई और ऊंची जाति की लड़की को वापस गांव ले आया गया था. और इसके बाद बहनों के भाई को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

बहनों के भाई पर प्रतिबंधित ड्रग्स रखने का आरोप लगाया गया था. अदालत से ज़मानत होने के बावजूद वो इस व़क्त जेल में हैं.

बहनों के वकील राहुल त्यागी के मुताबिक़ गांव में हो रहे कथित बहिष्कार की वजह से उनके परिवार को ज़मानत करवाने के लिए गांव से कोई ज़मानती नहीं मिल रहा.

मुख्यमंत्री से अपील, छिप गई बहनें

पिछले महीने बहनों की सुप्रीम कोर्ट में याचिका की ख़बर सामने आने पर अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनैश्नल सक्रिय हुई.

एमनेस्टी ने इंटरनेट पर डाली पेटीशन में लोगों से अपना नाम जोड़ने को कहा ताकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की जा सके.

इस अपील में अब तक दुनियाभर से हज़ारों लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं. दोनों बहनें पिछले कुछ महीनों से दिल्ली में छिपकर रह रही हैं.

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