बिहार में एनडीए: 'ना तुम हारे ना हम जीते'

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल पार्टियों के बीच बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा हो गया है.

इस बंटवारे से क्या संकेत मिलते हैं? प्रभात खबर अख़बार के संपादक राजेंद्र तिवारी कहते हैं, "बीजेपी ने यह पैग़ाम देने की कोशिश की है कि ना तुम हारे ना हम जीते".

उनका यह भी मानना है कि बंटवारे में बीजेपी को मिलने वाली सीटें पहले से तय थीं. गठबंधन की सब से बड़ी पार्टी बीजेपी सब से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इसे 160 सीटें मिली हैं.

भाजपा की रणनीति

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बिहार विधानसभा चुनाव 243 सीटों पर होगा. दूसरे सहयोगी दलों को सीटें इस तरह से मिलीं: राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को 40 सीटें और केंद्र सरकार में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को 23.

इसके अलावा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को 20 सीटें दी गई हैं.

ज़ाहिर है, 160 सीटों पर चुनाव लड़ने का फ़ैसला बीजेपी का अपना है और एनडीए में इसी पार्टी की चलेगी. बीजेपी 170 के आस पास सीटें चाहती थी. लेकिन 160 सीटें से भी वो खुश होगी.

इतनी सीटें हासिल करने के पीछे भाजपा का मक़सद क्या है?

असंतुष्ट सहयोगी

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Image caption केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा.

तिवारी कहते हैं, "बीजेपी को 160 सीटें मिलने का मतलब यह है कि सरकार बनाने की हालत में सहयोगी दलों पर निर्भरता न रहे. इसलिए आम चुनावों की तरह ही पार्टी बिहार विधानसभा में भी अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है."

सीटो के बंटवार से बीजेपी अगर संतुष्ट है तो कुछ सहयोगियों के असंतुष्ट होने के संकेत मिल रहे हैं.

विकल्प नहीं सहयोगियों के पास

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कहा ये जा रहा है कि जीतन राम मांझी भी रामविलास पासवान की तरह 40 सीटों पर चुनाव लड़ने पर ज़ोर दे रहे थे. लेकिन बीजेपी ने उन्हें 20 सीटें ही दीं.

अमित शाह ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मांझी को कुछ और सीटें दी जाएंगी, लेकिन उन सीटों पर मांझी के कार्यकर्ता बीजेपी चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे.

दरअसल, न पासवान और ना ही मांझी के पास कोई दूसरा विकल्प था.

मोदी से फ़ायदा

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पिछले साल आम चुनाव में पासवान को मोदी लहर से काफ़ी फ़ायदा हुआ था. इस चुनाव में भी सहयोगी दलों को इस बात का एहसास है कि अगर उन्हें कामयाबी मिली तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण ही मिलेगी.

प्रधानमंत्री एनडीए में शामिल चारों पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे. राजग में शामिल चारों पार्टियों का साझा चुनाव घोषणा पत्र होगा. इसका फ़ायदा भी भागीदार पार्टियों को मिलेगा.

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