कॉलेज परिसर में पुलिस चौकी बनाने का विरोध

  • 16 सितंबर 2015
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कॉलेज परिसरों और उससे बाहर छात्रों की सुरक्षा पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों का विरोध बढ़ रहा है.

छह माह पहले जारी इन दिशा निर्देशों में छात्रों की निगरानी को लेकर कुछ इस क़िस्म के सलाह दिए गए थे कि दिल्ली के कुछ कॉलेजों के शिक्षकों, छात्रों और उनके अभिभावकों ने आयोग को चिट्ठी लिख कर उसे इन्हें वापस लेने को कहा था.

चिट्ठी आयोग के अध्यक्ष को लिखी गई है. इस पर कविता कृष्णन, आयशा क़िदवई, जानकी अब्राहम, उमा चक्रवर्ती, मेरी जॉन और प्रतीक्षा बक्शी जैसे कई प्रमुख महिलाओं ने दस्तख़त किए हैं.

क्या हैं दिशा निर्देश

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1. इसमें कहा गया है कि कॉलेज परिसर में पुलिस चौकी की स्थापना की जाए.

2. गर्ल्स होस्टल की दीवारों को ऊंची की जाएं और उनपर कंटीली बाड़ लगाई जाए. इसके अलावा बैरीकेड लगाना और वॉच टॉवर बनाना.

3. गर्ल्स कॉलेज में सीसीटीवी कैमरे और चौबीसों घंटे निगरानी.

4. स्टूडेंट्स, ख़ास कर, लड़कियों को आस पास की जगह मसलन टैक्सी स्टैंड आदि पुलिस की निगरानी में जाने का इंतज़ाम करने की सलाह.

5. शिक्षक अभिभावकों से मुलाक़ात कर उन्हें छात्रों के बारे में सलाह देंगे, उनकी काउनसिलिंग करेंगे.

6. हॉस्टल वार्डन को हक़ होगा कि वह वहां रहने वाले स्टूडेंट्स की व्यक्तिगत जानकारी और उनके व्यवहार के बारे में जानकारी इकट्ठी कर अभिभावकों को बताएं.

विरोध

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आयोग को लिखी चिट्ठी में कहा गया है कि परिसर में पुलिस चौकी बनवाना विश्वविद्यालय की स्वायत्ता के ख़िलाफ़ है.

पुलिस चौकी का इस्तेमाल छात्रों के किसी भी तरह के आंदोलन को कुचलने में किया जा सकेगा.

चिट्ठी में कहा गया है कि सीसीटीवी कैमरे से छात्रों की निजता का उल्लंघन होगा, उनकी निजी ज़िंदगी में तांक झांक किया जा सकेगा.

हॉस्टल वार्डन को व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करने का नतीजा यह होगा कि उनकी जासूसी की जा सकेगी. लड़कियों के लिए यह ज़्यादा बुरा होगा.

कुछ लड़कियों के अभिभावक उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ उनका विवाह करवा देते हैं. इसके बाद इस तरह की घटनाएं बढ़ जाएंगी.

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