'मराठी जानना ज़रूरी, साहित्यकार नहीं बनना'

  • 16 सितंबर 2015
मुंबई के ऑटोरिक्शा. इमेज कॉपीरइट EPA

महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि राज्य में ऑटो रिक्शा के नए परमिट एक नवंबर से केवल उन्हीं लोगों को जारी किए जाएंगे जिन्हें मराठी भाषा आती है.

बीबीसी संवाददाता समीर आत्मज मिश्र ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता दिवाकर राउत ने कहा कि किसी को भी ऑटो का लाइसेंस मिल सकता है, वह किसी भी जाति, धर्म या प्रांत का हो सकता है. लेकिन इसके लिए अनिवार्य है कि वह राज्य में पिछले 15 सालों से रह रहा हो और मराठी जानता हो.

पुराना क़ानून

राउत ने कहा कि यहां ऑटो रिक्शा चलाने वाले को यहां के लोगों को लेकर ही आना-जाना है, इसलिए यह ज़रूरी है कि वह यहां की भाषा जानता हो. उसे यहां की भाषा आनी चाहिए.

उनके अनुसार मामला सिर्फ़ इतना ही है और ऑटो रिक्शा चलाने वाले को कोई साहित्यकार तो बनना नहीं है.

उन्होंने कहा कि ऑटो परमिट के लिए 15 साल से राज्य में रहने की अनिवार्यता हर जगह है.

दिवाकर रावत के अनुसार यह क़ानूनी है और संवैधानिक है.

वो कहते हैं, ''देखिए ऑटो लाइसेंस के लिए 15 साल से राज्य में रहने की अनिवार्यता पहले से है, यह कोई नई बात नहीं है. देखिए अब यह भी कहा जा रहा है कि हाई कोर्ट की भाषा भी उस राज्य की भाषा ही होनी चाहिए.''

उन्होंने उलटे सवाल किया कि अगर स्थानीय भाषा जानने वाले को ही परमिट दिया जा रहा है तो इसमें ग़लत क्या है.

वो कहते हैं कि ऑटो चालकों को जिनके लिए काम करना है उनकी भाषा तो उन्हें आनी ही चाहिए.

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