मेडिटेशन से खेती है 'समय की ज़रूरत'

  • 17 सितंबर 2015
धान के खेत

''ध्यान लगाने या मेडिटेशन करने से भी होती है बढ़िया खेती.''

सुनने में थोड़ा अटपटा सा लगता है लेकिन अपना चिंतन और चरित्र सुधार कर अच्छी खेती की जा सकती है. खेती करने के इस तरीक़े को कहा जाता है यौगिक खेती.

ब्रह्मकुमारी के ग्राम विकास शाखा के प्रमुख राजू भाई का कहना है ''इसमें ज़्यादा ख़र्चा नहीं लगता, और उपज भी बढ़िया होती है.''

राजू भाई के साथ यौगिक खेती के विषय पर बात की बीबीसी संवाददाता अनुराग शर्मा ने.

क्या है और कैसे की जाती यौगिक खेती है, पढ़िए विस्तार से-

शुद्ध भावनाओं का प्रयोग

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राजू भाई बताते हैं कि किसानों को मेडिटेशन करने की प्रेरणा दी जाती है ताकि किसान परमात्मा की शक्तियों को बीज में समेट सकें.

किसान बीज को मेडिटेशन रूम में रख कर सुबह-सवेरे परमात्मा का ध्यान कर संकल्प करते हैं कि उनकी शक्तियों बीज के अंदर आएं.

वे कहते हैं कि शुद्ध भावनाओं से पेड़-पौधे अच्छे बढ़ते हैं. इसलिए किसानों को अच्छी भावनाओं के साथ, अच्छा चिंतन और साफ़ चरित्र रखने के लिए प्रेरित किया जाता है.

पांच तत्व से संवाद

Image caption एक किसान एंडोसल्फ़ेन कीटनाशक का इस्तेमाल करते हुए.

खेती में कीटनाशक और ज़हरीली दवाईयों के स्थान पर जैविक पदार्थों के इस्तेमाल को तवज्जो दी जाती है.

महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान में कई जगहों पर क़रीब 2000 किसान इस तरह की खेती करना सीख रहे हैं.

राजू भाई के अनुसार इससे देढ़ से दो गुना उपज होती है और अधिक ख़र्च भी नहीं होता है.

यौगिक खेती के मूल में है पंच तत्व यानि कि - वायु, जल, आकाश, भुमि, अग्नि - से संवाद स्थापित करना. इससे प्रकृति का सहयोग पेड़-पौधों के मिलता है.

वैज्ञानिक आधार

राजू भाई कहते हैं कि पंत नगर, दांतेवाड़ा, करनाल, अमरावती में विश्वविद्यालय में इस पर वैज्ञानिक रिसर्च चल रहा है.

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राजू भाई दावा करते हैं कि इस रिसर्च में पाया गया है कि इस तरीक़े के चलते पौधों में रोग नहीं लगा है, उनमें उपजने की क्षमता बढ़ी है और उर्वरा शक्ति में भी विकास हुआ है.

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हाल में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने दिल्ली में किसान सशक्तिकरण अभियान में कहा था कि यौगिक खेती से भारत के किसानों का जीवन सुधरेगा. उन्होंने इसे ''समय की ज़रूरत'' बताया था.

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