'हमें दिल्ली का मांझी कहा, अच्छा लगा'

राजेश कुमार और लक्ष्मीचंद्र इमेज कॉपीरइट AMIT BHASKAR
Image caption फ़िल्म मांझी के कलाकारों की ओर से राजेश कुमार शर्मा (दाएं) और शिक्षकों को सम्मानित किया जा चुका है.

दिल्ली के यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन के निकट 'द अंडर ब्रिज स्कूल' साल 2006 से अपनी जगह बनाए हुए है.

हालाँकि ये कोई मान्यताप्राप्त स्कूल तो नहीं, लेकिन यमुना तट पर फूलों की खेती करने वाले किसानों के बच्चों के लिए ये बहुत मायने रखता है.

दुकान चलाने वाले राजेश कुमार शर्मा समय निकाल कर सुबह और शाम में यहाँ बच्चों को पढ़ाते हैं.

राजेश कुमार बताते हैं, "मैंने अकेले ही इस स्कूल की शुरुआत की, फिर बच्चे बढ़ते गए तो कई और शिक्षकों ने मुफ्त में सेवा देने की पेशकश की."

वो कहते हैं, "आज हमारे पास बच्चों को पढ़ाने के लिए 5 लोग हैं. इसके अलावा कुछ युवा समय निकाल कर पढ़ाने आ जाते हैं."

यहाँ आने वाले ज़्यादातर बच्चे पास के ही राजकीय सर्वोदय बाल स्कूल में पढ़ने जाते हैं.

दिल्ली का मांझी

इमेज कॉपीरइट AMIT BHASKAR

दोपहर से पहले लड़कियों की शिफ़्ट होती है और दोपहर के बाद लड़कों की शिफ्ट.

इसी समय के अनुसार, लड़के अंडर ब्रिज स्कूल में सुबह 9 बजे से 11 बजे तक पढ़ने आते हैं और लड़कियां 2 बजे से 4 बजे तक.

अंडर ब्रिज स्कूल में मेट्रो की दीवार पर काले रंग से पुताई करके कई ब्लैकबोर्ड बनाए गए हैं.

आस-पास के लोगों की मदद से चबूतरे का निर्माण कर लिया गया है जिसपर चढ़कर शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं. यहाँ कुल मिलाकर 200 बच्चे पढ़ने आते हैं.

यहीं पढ़ाने वाले लक्ष्मीचंद्र बताते हैं कि हाल में ही फ़िल्म मांझी की टीम ने उन्हें और राजेश कुमार शर्मा को दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में स्थित सूर्या होटल में मिलने बुलाया.

मांझी की टीम द्वारा दी गई भेंट को दिखाते हुए लक्ष्मीचंद्र कहते हैं, "1980 से नालंदा के आसपास गरीब बच्चों को पढ़ाता था, उस समय दशरथ मांझी के गाँव में भी मैंने गरीब बच्चों को पढ़ाया. मांझी फ़िल्म की टीम ने हमें दिल्ली का मांझी कहा, हमें बहुत अच्छा लगा."

सहयोग

इमेज कॉपीरइट AMIT BHASKAR

इस स्कूल में हाल में ही नया शौचालय बना है जिससे बच्चों को ख़ास करके लड़कियों को अब असुविधा नहीं होती है.

राजेश कुमार आगे बताते हैं, "ये शौचालय लगने की जानकारी मेट्रो के अधिकारियों को नहीं है, इसीलिए डर है कि वो इसे हटा देंगे, हालांकि पानी के लिए मिली नई सुविधा मेट्रो ने ख़ुद दी है. ज़मीन को समतल बनाना बाकी है, वो काम भी धीरे-धीरे हो जाएगा."

इमेज कॉपीरइट AMIT BHASKAR

राजेश कुमार शर्मा बताते हैं, "यहाँ हम बच्चों को खेलने के लिए बैडमिंटन, फुटबॉल, बॉलीबाल आदि देते हैं लेकिन मेरी इच्छा है कि शकरपुर में एक कमरा लेकर बच्चों को कंप्यूटर सिखाने की व्यवस्था भी करूँ."

हालांकि ये बहुत महंगा काम है और बिना लोगों के सहयोग से हो नहीं पाएगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार