'पाकिस्तानी नाटक ज़्यादा संजीदा होते हैं'

दिल्ली में पाकिस्तान थिएटर फेस्टिवल

पाकिस्तानी थिएटर ग्रुप 'अजोका' और भारत के ग़ैर-सरकारी संगठन 'रुट्स 2 रूट्स' ने दिल्ली में पाकिस्तानी नाट्य उत्सव 'हमसाया' का आयोजन किया.

इस नाट्य उत्सव का आयोजन मंडी हाउस स्थित कमानी ऑडिटोरियम में 14 से 17 सितंबर के बीच किया गया.

इसमें नाटक लेखक शाहिद नदीम और निर्देशक मदीहा गौहर के चार नाटक, 'बुल्लाह', 'दारा', 'कौन है ये गुस्ताख़' और 'लो फिर वसंत आई' का मंचन किया गया.

नाटक 'बुल्लाह' का एक दृश्य.

नाटक 'बुल्लाह' का एक किरदार सरदार बंदा बैरागी.

नाट्य उत्सव के सभी नाटकों को देखने वाली अनीसा बताती हैं, ''उर्दू के अल्फ़ाज़ों के तलफ़्फ़ुज़ में पाकिस्तानी कलाकार भारतीय कलाकारों से इक्कीस हैं.''

नाटक 'दारा' के एक दृश्य में पाकिस्तानी अदाकार उस्मान राज.

कविता ठकराल कहती हैं, "पाकिस्तानी नाटक ऐतिहासिक तथ्यों पर भारतीय नाटकों के मुक़ाबले ज़्यादा संजीदा मालूम पड़ते हैं. दारा नाटक के ज़रिए हम मुग़ल बादशाह दारा शिकोह की ज़िंदगी को और भी बेहतर ढंग से जान सके हैं."

नाटक 'दारा' का एक दृश्य.

नाटक 'कौन है ये गुस्ताख़' का एक दृश्य.

'बुल्लाह' और 'मंटो' के किरदार को जीवित करने वाले उस्मान राज भारत में कई बार नाटक कर चुके हैं. वह कला के प्रति यहाँ के दर्शकों की संजीदगी और कलाकारों के प्रति दीवानगी से बहुत प्रभावित दिखे.

नाटक 'कौन है ये गुस्ताख़' के एक दृश्य में मंटो के किरदार में उस्मान राज.

नाटक 'लो फिर वसंत आई' का एक दृश्य.

पाकिस्तान और भारत के नाटकों के मंचन में बुनियादी फ़र्क़ बताते हुए वह कहते हैं, "यहाँ नाटकों के मंचन के दौरान पिन ड्रॉप साइलेंस होता है और बीच-बीच में तालियों गड़गड़ाहट की गूँज भी ख़ूब सुनाई देती है."

उस्मान राज चाहते हैं कि दोनों मुल्कों के बीच कुछ ऐसा अमन क़ायम हो कि वो दिन का नाश्ता अमृतसर में करें तो रात का खाना लाहौर में खाएं.

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