संघ के आरक्षण संबंधी बयान पर गरमाई राजनीति

  • 21 सितंबर 2015
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की नीति पर पुनर्विचार की वकालत करते हुए कहा है कि यह तय होना चाहिए कि कितने लोगों को कितने दिनों तक आरक्षण दिया जाना चाहिए.

संघ के मुखपत्र "पांचजन्य" और "आर्गेनाइज़र" के साथ साक्षात्कार में भागवत ने सरकार को सुझाव दिया है कि वो इस मुद्दे को लेकर एक समिति का गठन करे.

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संघ के मुखपत्र को दिए साक्षात्कार में भागवत का कहना था कि जातिगत आरक्षण का दुरुपयोग हुआ है और राजनीतिक दलों ने इसका फ़ायदा भी उठाया है.

उनका कहना था कि इसी लिए इसकी आवश्यकता पर फिर से विचार करने की ज़रुरत है.

गरमाई राजनीति

भागवत के साक्षात्कार पर राजनीति गरमा गई है और कांग्रेस ने इसपर पलटवार करते हुए कहा है कि अगर ऐसा होता है तो देश में वर्ग संघर्ष शुरू हो जाएगा.

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कांग्रेस के सचिव भक्त चरण दास ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि आज़ादी के इतने सालों के बाद आज भी इतनी जातियां हैं जिनकी आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति बिलकुल हाशिये पर है.

उनका आरोप था कि मोहन भागवत के बयान से साफ़ है कि संघ किस एजेंडे पर काम कर रहा है.

वहीं जनता दल (यूनाइटेड) का आरोप है कि क़तार के आख़िरी लोगों को सत्ता से दूर रखने की साज़िश के तहत ही ऐसी बातें कही जा रही हैं.

पार्टी के राज्य सभा सांसद ग़ुलाम रसूल बलियावी कहते हैं कि संविधान में ऐसा रास्ता निकाला गया है कि समाज के पिछड़े लोगों के उत्थान के लिए आरक्षण ज़रूरी है.

वो कहते हैं कि संविधान में किए गए इस प्रावधान से छेड़छाड़ उस रास्ते को बंद करने की साज़िश ही है.

हालांकि अभी तक भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से मोहन भागवत के साक्षात्कार पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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