राम रहीम को 'माफ़' किया अकाल तख़्त ने

  • 25 सितंबर 2015
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डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के 'माफ़ीनामे' को सिखों की संस्था अकाल तख़्त ने मंज़ूर कर लिया है.

इसके साथ ही जत्थेदारों ने उन्हें ये हिदायत भी दी है कि राम रहीम ऐसा कोई काम न करें, जिससे सिखों की भावनाएं आहत होती हों.

गुरमीत कई बार विवादों में रहे हैं. साल 2007 में उनकी एक तस्वीर छपी, जिसमें वे सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह की वेशभूषा में थे और उनके जैसे ही दिख रहे थे.

इसके बाद सिखों और डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों में हिंसक झड़पें भी हुईं थीं. इनमें सैकड़ों लोग जख़्मी हुए थे और एक शख़्स की मौत हो गई थी.

अकाल तख़्त के प्रमुख ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती ने डेरा प्रमुख के बहिष्कार की अपील की थी.

डेरा की सफ़ाई?

Image caption डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख की चिट्ठी

डेरा सच्चा सौदा की 35 शाखाएं हैं और इसका दावा है कि इसके कई लाख समर्थक पंजाब और हरियाणा में हैं.

गुरुवार को अकाल तख़्त की बैठक में कहा गया कि डेरा प्रमुख ने माफ़ी मांगी है, जिसे मंज़ूर कर लिया गया.

तख़्त के प्रमुख ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि डेरा प्रमुख ने स्पष्टीकरण दिया है कि उनका मक़सद किसी समुदाय की भावनाओं को चोट पंहुचाना नहीं रहा. उन्होंने कभी किसी संत या गुरु की अवहेलना करने की बात सोची भी नहीं.

जत्थेदार ने यह भी कहा कि डेरा प्रमुख से कहा गया कि वे भविष्य में कभी ऐसा कोई काम न करें, जिससे सिखों की भावनाएं आहत हों.

सिख समाज में गुस्सा

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सिख समाज के कई वर्गों में इस पर गुस्सा है. उनका कहना है कि पांच जत्थेदारों ने गुपचुप तरीके से ही मामला निपटा लिया और पूरे पंथ को विश्वास में नहीं लिया गया.

शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक समिति के कार्यकारी सदस्य किरणजोत कौर ने कहा कि 2007 में जारी हुक़्मनामे को बदलने का कोई हक़ जत्थेदारों को नहीं है. लिहाज़ा, उन्होंने इसे बदल कर ग़लती की है.

यूनाइटेड अकाली दल के अध्यक्ष मोहकम सिंह ने कहा कि अकाल तख़्त का फ़ैसला 'राजनीति से प्रेरित' है. उनका मानना है कि यह माफ़ी नहीं, सिर्फ़ स्पष्टीकरण था. इसे स्वीकार करने वाले अकाल तख़्त और पांच जत्थेदारों को सिख पंथ कभी माफ़ नहीं करेगा.

'सिख धर्म की बुनियाद पर चोट'

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अमरीकी गुरद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष जेएस होथी और को-ऑर्डिेनेटर पृथपाल सिंह ने साझा बयान में कहा कि इस माफ़ीनामे को स्वीकार किए जाने से वे अचरज में हैं.

बयान में कहा गया है कि डेरा ने अपने किए के लिए माफ़ी नहीं मांगी है, जबकि उसने सिख धर्म की बुनियाद पर ही चोट की थी.

शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के प्रमुख परमजीत सिंह सरना ने कहा कि इस फ़ैसले से सिखों की भावनाओं पर चोट पहुंची है. उन्होंने कहा, "यह गुपचुप तरीके से हुआ, जो दुर्भाग्यपूर्ण है."

सरबत खालसा की मांग

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अकाल पुरख फ़ौज के प्रमुख जसविंदर सिंह एडवोकेट ने सवाल उठाया कि डेरा की करनी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हुए जो लोग मारे गए, उनके रिश्तेदारों को कौन जवाब देगा?

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