'बालिका वधू' अब बहुत बड़ी हो गई है

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भारतीय टेलीविज़न के इतिहास में अगर लंबे अरसे तक चलने वाले धारावाहिकों की बात करें तो आप शायद एकता कपूर के धारावाहिकों 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' और 'कहानी घर घर की' का नाम लें.

लेकिन इन दोनों धारावाहिकों को पछाड़कर सबसे ज़्यादा एपिसोड दिखाने वाले सीरियलों की लिस्ट में पहले पायदान पर पहुंचा है 'बालिका वधू'.

सात साल पहले 21 जुलाई 2008 को कलर्स चैनल के लांच होने के साथ ही शुरू हुआ था 'बालिका वधू' का सफ़र.

इस धारावाहिक के सफ़र, सफ़लता के कारणों और इसकी वर्तमान हालत पर नज़र डाल रहे हैं बीबीसी संवाददाता सुशांत मोहन.

आठ साल पहले

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कलर्स के पहले फ़्लैगशिप शो के तौर पर शुरू हुए इस धारावाहिक ने टीवी चैनलों पर आ रहे सास बहू धारावाहिकों की एकरसता को तोड़ा.

जैतसर, उदयपुर और राजस्थान की पृष्ठभूमि में बने इस धारावाहिक ने रातोंरात टीआरपी की जंग जीत ली और 'बालिका वधू' की पहली बालिका अभिनेत्री अविका गौर सुपरहिट हो गईं.

आज सात साल बाद इस धारावाहिक की पूरी कास्ट बदल चुकी है, यहां तक की आनंदी का किरदार निभाने वाली अभिनेत्रियां भी तीन बार बदल चुकी हैं लेकिन बाल विवाह की कुरीति पर चोट करते इस धारावाहिक का सफ़र बदस्तूर जारी है.

सोशल धारावाहिक

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कलर्स चैनल के सीईओ राज नाईक के अनुसार, "बीते सात सालों में कलर्स ने बतौर चैनल एक अलग पहचान बनाई है और इस अलग पहचान के लिए बालिका वधू की एक बड़ी भूमिका है."

बाल विवाह की प्रथा और इसकी परेशानियों को दिखाने वाले इस धारावाहिक में घरेलू हिंसा, दहेज, वैवाहिक बलात्कार, विधवा पुनर्विवाह और कन्या भ्रूण हत्या जैसै मुद्दों को दिखाया गया.

'ये रिश्ता क्या कहलाता है' जैसे धारावाहिक के निर्माता और मशहूर टीवी निर्देशक राजन शाही कहते हैं, "उनकी टीम को बधाई, ये दिखाता है कि कंटेंट ही असल विजेता होता है और दर्शक कुछ नया देखना चाहते हैं. ये ऐसा सीरियल था जिसने 'सोशल धारावहिक की शैली बना दी."

बालिका वधू ने ऐसे धारावाहिकों के लिए रास्ता खोल दिया. फिर कलर्स पर ही 'न आना इस देस लाडो', 'उड़ान' और दूसरे चैनलों पर 'गंगा' जैसे धारावाहिक आए, जो 'सास बहू' धारावाहिकों के दौर में कल्पना से बाहर था.

वर्तमान

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हालांकि बालिका वधू ने 2000 एपिसोड पूरे कर लिए हैं लेकिन इसकी टीआरपी में गिरावट आई है.

टीवी पत्रकार श्राबंती बताती हैं, "यह कलर्स के सबसे सफ़ल धारावाहिकों में से एक है, यह सच है लेकिन अब इसकी वह लोकप्रियता नहीं रही जो पहले होती थी और यह टीआरपी में इसकी गिरावट से पता चलता है."

लखनऊ से मुंबई आकर रहने वाली 28 वर्षीया अपूर्वा बताती हैं, "हम जब लखनऊ में इसे देखते थे तो इसकी कहानी काफ़ी 'मॉरल' होती थी लेकिन अब ये भी टिपिकल हो गई है."

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वहीं कास्ट का बदल जाना भी इस धारावाहिक की घटती लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है. इसे देखने वाले अशोक कहते हैं, "पहले आनंदी ही बदल गई और अब सारे किरदार बदल गए हैं ऐसे में नए लोगों के साथ वो मज़ा नहीं आता."

इस धारावाहिक में अब तक की कहानी के आधार पर आनंदी अब अपनी किडनैप हो चुकी बेटी से मिलने वाली है.

धारावाहिक में अविका गौर और प्रत्यूषा बनर्जी के बाद आनंदी का किरदार निभा रही तोरल (तीसरी आनंदी) कहती हैं, "हम दर्शकों के आभारी हैं और मुझे गर्व है कि मैं टीवी के एक माइलस्टोन धारावाहिक का हिस्सा हूँ और उम्मीद करती हूँ कि शो के अंत तक इसका हिस्सा रहूंगी."

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