राहुल की ग़ैर मौजूदगी का बिहार पर असर ?

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मज़ाक का पात्र बन गए हैं. अमूमन लोग उनका मख़ौल उड़ाते हैं. सोशल मीडिया पर उन्हें ‘पप्पू’ कहा जाता है.

इसकी एक बड़ी वजह यह है कि राजनेता के रूप में राहुल गांधी की ताक़त कम है. पूरे देश की जनता पर उनकी पकड़ या उनका ख़ास असर नहीं है. पार्टी के अंदर ही उनके नेतृत्व पर सवाल उठता रहा है.

दूसरी बात यह है कि राहुल गांधी के पूरे कामकाज में पारदर्शिता की कमी है. लोगों को पता नहीं चलता है कि वे क्या कर रहे हैं, कहां जा रहे हैं.

उनकी विदेश यात्रा की बातें ख़ुद कांग्रेस में ही लोगों को मालूम नहीं रहती हैं. कई बार पार्टी के लोग ही यह सवाल उठाते हैं.

'ग़लतियों से सीखते नहीं'

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राहुल की कमी यह है कि वे अपनी ग़लतियों से कुछ सीखते नहीं हैं.

एक बात ज़रूर राहुल के पक्ष में जाती है और वह है हमारी राजनीतिक प्रणाली में ख़ामी.

देश में लोग यह नहीं समझते है कि राजनेताओं की भी निजी ज़िंदगी होती है. उन्हें भी छुट्टी लेने या सैर सपाटे पर जाने का हक़ है.

उनके पिता राजीव गांधी को भी इस समस्या से जूझना पड़ा था. वे जब निजी छुट्टी पर परिवार के साथ गए थे, लोगों ने उनका भी मज़ाक उड़ाया था.

'बिहार चुनाव पर असर नहीं'

जहां तक बिहार चुनाव का सवाल है, राहुल गांधी के मौजूद नहीं रहने से कांग्रेस को बहुत ज़्यादा नुक़सान नहीं होगा.

बिहार में कांग्रेस की स्थिति पहले से ही ख़राब है. पिछले चुनाव में या उससे पहले भी कांग्रेस ने वहां बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था.

इस बार जिन 40 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ने वाली है, उनमें से ज्यादातर सीटें बेहद कमज़ोर है.

'राहुल लॉबी नाख़ुश'

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लिहाज़ा, यह सच है और ख़ुद कांग्रेस के लोग भी मानते हैं कि राहुल के न रहने से नतीजों पर बहुत असर नहीं पड़ेगा.

कांग्रेस पार्टी के अंदर राहुल लॉबी के लोग और उनके समर्थक पार्टी नेतृत्व से बहुत ख़ुश नहीं है. उन्हें ज़्यादा अधिकार और तवज्जो नहीं मिल रही है.

यह साफ़ कर दिया गया है कि पार्टी की कमान कम-से-कम साल भर राहुल के हाथ नहीं सौंपी जाएगी.

बीते आम चुनावों में हार की समीक्षा कांग्रेस के अंदर अब तक नहीं हुई है. इससे भी पार्टी के अंदर लोगों में नाराज़गी है.

(बीबीसी संवाददाता प्रगति सक्सेना से हुई बातचीत पर आधारित)

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