मास्टर जी बनना चाह रहे हैं 'मुन्ना भाई'

  • 28 सितंबर 2015
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झारखंड में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए चल रही काउंसलिंग में कोई चिट के साथ पकड़ा जा रहा है, तो किसी के पास एक ही साल की दो-तीन डिग्रियां मिल रही हैं.

पुलिस ने कथित फ़र्ज़ी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के आरोप में अब तक चार लोगों को गिरफ़्तार है जिनमें एक पैरा-शिक्षक (शिक्षा मित्र) भी शामिल हैं.

इनके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक मामलों में जांच हो रही है जिसकी वजह से कई जगहों से अभ्यर्थी काउंसलिंग लेने से ही भाग गए हैं.

शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वाले रांची के एक युवक रितेश का आरोप है, ''कायदे से जांच हो तो बड़े पैमाने पर घोटाला सामने आ सकता है.''

सख्त निर्देश

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मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड की शिक्षा सचिव आराधना पटनायक ने सभी ज़िलों के उपायुक्तों और शिक्षा अधिकारियों को प्रमाण पत्रों की जांच में सतर्कता बरतने के लिए कहा है.

राज्य में शिक्षा विभाग और झारखंड अकेडमिक काउंसिल की देखरेख में कक्षा एक से पांच तक और कक्षा पांच से आठ तक के लिए ज़िलावार 18 हज़ार शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जा रही है.

गिरिडीह ज़िले में गुरुवार को दो लोगों की गिरफ़्तारी के बाद उपायुक्त उमाशंकर सिंह ने कहा है कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने में किसी गिरोह का हाथ हो सकता है.

उन्होंने काउंसलिंग के समय दंडाधिकारी के साथ पुलिस बल की तैनाती भी कर दी है.

गिरिडीह के अलावा जामताड़ा में भी कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

चिट से जवाब

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गिरिडीह और जामताड़ा के अलावा बोकारो, धनबाद, दुमका, गोड्डा में भी फर्जीवाड़े के कई मामले पकड़ में आए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि धनबाद में एक अभ्यर्थी कथित तौर पर चिट देखकर जवाब देते पकड़े गए लेकिन किसी तरह भाग निकले.

इस बीच राज्य शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक हंसराज सिंह ने फर्जी प्रमाण पत्र हासिल करने वाले पैरा-शिक्षकों को खुद ही सेवा छोड़ देने की हिदायत दी है.

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