सड़क पर पढ़ने वाले हरेंद्र बनना चाहते हैं अफ़सर

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दिल्ली से सटे नोयडा में एक मेट्रो स्टेशन के बाहर स्ट्रीट लैंप की रोशनी में पढ़ाई कर सुर्खियोें में छाने वाले हरेंद्र भारतीय सेना में अफ़सर बनना चाहते हैं.

बीबीसी के साथ बातचीत में हरेंद्र ने कहा कि वे बचपन से ही सेना में अफ़सर बनना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी है लेकिन इससे उनकी इच्छा शक्ति टूटी नहीं है.

बीते दिनोें किसी ने उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की तो वह सुर्खियोें में छा गए.

इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनसे मुलाकात की और उन्हें पांच लाख रुपए की सहायता देने का ऐलान किया.

हरेंद्र इससे खुश हैं. वे इन पैसोें का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई में करेंगे.

वे स्ट्रीट लैंप में पढ़ने को कोई बहुत बड़ा मुद्दा नहीं मानते. उन्होेेंने कहा, "गांव में लोग अभी भी लालटेन या ढिबरी में पढ़ते हैं, मैंने तो फिर भी बिजली की रोशनी में पढ़ाई की."

हरेंद्र को स्ट्रीट लैंप में पढ़ाई करने या फिर वजन करने वाली मशीन पर काम करने का भी कोई मलाल नहीं है.

उन्होंने कहा, "मशीन रखी हुई थी और मैं बीच बीच में उससे जुड़ा काम भी करता रहता था. बाकी समय तो मैं पढ़ाई ही करता था."

सड़क पर आने जाने वाली गाड़ियों के हॉर्न की आवाज़, लोगों का शोर गुल, हरेंद्र को इनकी भी कोई परवाह नहीं है.

वे कहते हैं, "शोर गुल तो होता था, पर इससे मेरा ध्यान कभी भंग नहीं हुआ. मैं इनके बीच भी पढ़ता रहा."

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