क्या बगंलुरु इंटरनेट में बहुत पीछे है?

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एक सामाजिक-आर्थिक और जातीय सर्वेक्षण में भारत की आईटी सिटी के नाम से मशहूर बंगलुरु में कंप्यूटर और इंटरनेट क्नेक्टिविट के बारे में आश्चर्यजनक आंकड़े सामने आए हैं.

इनके मुताबिक़ शहर के 23.17 लाख घरों में से केवल 17.21 फ़ीसदी घरों में ही इंटरनेट क्नेक्टिविटी है. वहीं 6.32 फ़ीसदी घरों में बिना इंटरनेट कनेक्शन वाला कंप्यूटर या लैपटॉप है. जबकि राज्यस्तर पर इंटरनेट कनेक्टिविटी 10.40 फ़ीसदी है.

बंगलुरु के 82.71 फ़ीसदी लोगों के पास मोबाइल फ़ोन है, जबकि पूरे राज्य में यह 81.40 फ़ीसदी है.

आंकड़ों पर सवाल

इन आंकड़ों को देखने से दो सवाल पैदा होते हैं, पहला यह कि बंगलुरु में इंटरनेट कनेक्टिविट के विस्तार के बारे में रिपोर्ट में सही सूचनाएं नहीं दी गई हैं, क्योंकि बंगलुरु में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों की संख्या सबसे अधिक है.

दूसरा यह है कि सर्वेक्षण के चार साल बाद जब राज्य के शहरी विकास और पंचायती राज मंत्रालय ने इन आंकड़ों को जारी किया तो इनकी वैधता क्या है. यह सर्वेक्षण 2011 के दिसंबर में शुरू हुआ था और 2012 के शुरूआती महीनों में पूरा हुआ था.

इस मामले पर राज्य सरकार और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की राय अलग-अलग है.

कर्नाटक के शहरी विकास और पंचायती राज मंत्री एचके पाटील ने बीबीसी से कहा, '' यह सर्वेक्षण यह जानने में मदद करेगा कि हमें सामाजिक-आर्थिक परियोजनाएं किस तरह बनानी चाहिए. यह हमें ठीक से योजनाएं बनाने और संसाधन जुटाने में मदद केरगा.''

मोबाइल इंटरनेट

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मनिपाल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष और इंफ़ोसिस के पूर्व एचआर निदेशक एमडी पई कहते हैं, '' मैं यह नहीं जानता कि उन्होंने यह पूछा की नहीं कि कितने लोगों के पास इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ स्मार्ट फ़ोन है. ट्राई (टीआरएआई) के आंकड़ों के मुताबिक़ देश में 16-17 करोड़ मोबाइल इंटरनेट क्नेक्टिविटि है और बंगलुरु इस मामले में अग्रणी है.''

वो कहते हैं, '' यह भी सही है कि पिछले तीन साल में मोबाइल इंटरनेट एक परिघटना के रूप में बढ़ा है, यह 2011 का सर्वेक्षण है, जो चार साल बाद जारी हुआ है. स्वाभाविक है कि परिस्थितियां नाटकीय रूप से बदली हैं.''

पाटील कहते हैं, '' सर्वेक्षण में जो आंकड़े मिले हैं, उन पर संदेह करने का मेरे पास कोई कारण नहीं है. बहुत से व्यावसायिक लोगों के पास अपने आंकड़े हैं. मैं कह सकता हूं कि सर्वेक्षण सच बतलाता है.''

वो कहते हैं, '' इस सर्वेक्षण में हर परिवार का मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) को निर्धारित किया जा सकता है. इसमें लोगों के घरों की छत से लेकर उनके घर में मौज़ूद संसाधनों तक को शामिल किया गया है. आप यह भी नोट कर ले कि यह परिवारों का सर्वेक्षण है. बहुत से लोगों के पास उनकी कंपनियों द्वारा दिया गया लैपटॉप और कंप्यूटर है.''

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