दुर्गम क़िलों में भी था पानी का इंतज़ाम

भारत में शुरू से ही नदी, झरने, कुँए और तालाब पानी के प्रमुख स्रोत रहे हैं.

लेकिन ज़रा सोचिए कि सुरक्षा के लिहाज़ से जब रियासतें शहरों से भी ऊँचाई पर या वीराने में बड़े-बड़े क़िले बनवाती थीं तब वहां पानी का क्या स्रोत रहा होगा? पानी के बचाव के लिए क्या तरीक़े अपनाए जाते रहे होंगे?

आइए हम बताते हैं भारत के कुछ ऐसे ही क़िलों में पानी के इंतज़ाम के बारे में.

जहाज़ महल, मांडू, मध्य प्रदेश

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Image caption इस 120 मीटर बड़े महल का नाम ही इसलिए पड़ा क्योंकि ये दो मानव निर्मित झीलों के बीच बनाया गया था. महल इनके बीच पानी में तैरते जहाज़ की तरह दिखता है. झील में भरे पानी का इस्तेमाल महीनों होता था. यह महल में ठंडक भी पहुंचाता था.
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Image caption महल में नहाने का सार्वजनिक स्थल बनाया गया था, जिसके लिए नियमित तौर पर पानी इकठ्ठा किया जाता था.
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Image caption जहाज़ महल से सटे हुए शाही महल में हज़ारों लीटर पानी जमा किया जाता था.
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Image caption महल के अंदर पानी जमा करने का शाही टैंक.

कांगड़ा फ़ोर्ट, हिमाचल प्रदेश

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Image caption शाही हमाम के पास बना है पानी का टैंक.
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Image caption किले के बाहरी हिस्से में पीने के पानी को जमा करने वाला यह विशालकाय टैंक सभी की ज़रूरतें पूरी करता था.

पनहलगढ़ फ़ोर्ट, महाराष्ट्र

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Image caption मराठा शासकों ने एक तीन-मंज़िला 'अँधा कुआँ' बना रखा था ताकि दुश्मन पानी में ज़हर न मिला सकें. पास के पहाड़ों के झरनों से इस कुएं में ख़ुफ़िया तरीके से पानी पहुंचाने का रास्ता था.

नागौर फ़ोर्ट, राजस्थान

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Image caption राजपूतों के इस किले में इन नालियों के ज़रिए दूर-दराज़ से पानी पहुंचाया जाता था.

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