श्रीनगर में अहमदिया कांफ्रेंस का विरोध

  • 5 अक्तूबर 2015
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भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में धार्मिक संगठनों ने सरकार को ख़बरदार किया है कि कश्मीर में अहमदिया शांति कांफ्रेंस न कराई जाए.

'अहमदिया जमात श्रीनगर' ने श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर से शहर में 'शांति कांफ्रेंस' करने की इजाज़त मांगी है.

लेकिन घाटी के धार्मिक संगठनों ने सरकार से कहा है कि वो अहमदियों को ऐसी कोई कांफ्रेंस न होने दे.

कश्मीर में अहमदिया समुदाय पहली बार इस तरह की कांफ्रेंस करना चाहता है.

कुछ मुस्लिम संगठनों का कहना है कि वो अहमदिया लोगों को मुसलमान नहीं मानते हैं, इसलिए ये लोग 'इस्लाम के नाम पर कैसे कांफ्रेंस कर सकते हैं'.

इजाज़त पर ख़ामोश प्रशासन

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'अहमदिया जमात श्रीनगर' ने 15 सितम्बर को प्रशासन को एक पत्र लिखा था जिसका अभी तक उसे जवाब नहीं मिला है.

संगठन के प्रवक्ता फ़ारूक़ अहमद निसार ने बीबीसी को बताया, "हम 10 अक्टूबर तक सरकार के जवाब का इंतज़ार करेंगे. अगर इजाज़त मिलती है तो ठीक है, अगर नहीं तो हम क़ानून को अपने हाथों में नहीं लेंगे."

फ़ारूक़ अहमद सवाल करते हैं, "जब इतनी बड़ी आबादी को हम कुछ मुट्ठी भर लोगों से ख़तरा पैदा हो रहा है तो क्या हम लोगों को इतनी बड़ी तादाद से ख़तरा नहीं है?" जम्मू कश्मीर में अहमदियों की कुल तादाद 50,000 हज़ार के क़रीब है.

विरोध

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जम्मू कश्मीर जमात-ए-इस्लामी के प्रवक्ता ज़ाहिद अहमद ने बीबीसी को बताया, "हम कश्मीर में अहमदियों की किसी भी कांफ्रेंस का विरोध करते हैं, क्योंकि वो मुसलमान नहीं हैं. वो इस्लाम के नाम पर कश्मीर में कांफ्रेंस नहीं कर सकते हैं."

वो कहते हैं, "अगर वो ये कहें कि हम मुसलमान नहीं हैं तो फिर कांफ्रेंस कर सकते हैं, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वो ये कहें कि हम मुसलमान हैं तो हमें ये मंज़ूर नहीं है. उनको तो इस्लाम से बेदख़ल किया गया है, वो कैसे इस्लाम के नाम पर कांफ्रेंस कर सकते हैं?"

वो आगे कहते हैं, "उनके कांफ्रेंस करने से कश्मीर में इस्लाम का एक ग़लत संदेश जाएगा, जिसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं."

ख़तरा

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जमीयत अहले-हदीस जम्मू-कश्मीर ने भी श्रीनगर में अहमदियों के कांफ्रेंस आयोजित करने का विरोध किया है.

संगठन ने एक बयान में कहा है कि अगर श्रीनगर में इस तरह की कांफ्रेंस आयोजित करने की इजाज़त दी गई तो कश्मीर में क़ानून व्यवस्था ख़राब होने का ख़तरा है.

संगठन ने अपने बयान में सवाल किया है, "अहमदिया जब मुसलमान नहीं हैं तो फिर इस्लाम के नाम पर कांफ्रेंस करने का क्या मक़सद है?"

कश्मीर के मुफ़्ती नज़ीर अहमद क़ासमी ने भी प्रेस को जारी बयान में श्रीनगर में अहमदी कांफ्रेंस का विरोध किया है.

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