वाराणसी में कर्फ़्यू हटा, बंद रहेंगे स्कूल

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पुलिस के अनुसार एक जुलूस के कारण पैदा तनाव के सिलसिले में 30 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.

साधु-संतों की प्रतिकार यात्रा के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद वाराणसी के जिन चार पुलिस स्टेशनों के तहत आने वाले इलाके में कर्फ्यू लगा था वो दो घंटे के बाद हटा दिया गया. कर्फ्यू कोतवाली, दशाश्वमेध, लक्सा और चौक पुलिस स्टेशन में आने वाले क्षेत्रों में लगाया गया था.

वाराणसी मंडल के कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने बताया कि ऐतिहात के तौर पर कल शहर के सभी स्कूल और कॉलेज बंद रखने का आदेश दिया गया है.

शहर में सोमवार को स्वामी अविमुक्तानंद के नेतृत्व में कुछ लोगों ने रैली निकाली.

पुलिस का कहना है कि इस दौरान नाराज़ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया और वाहनों में आग लगानी शुरू कर दी.

ये रैली 22 सितंबर को हुए लाठी चार्ज के विरोध में थी, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ये साधु गणेश प्रतिमा का विसर्जन गंगा में करना चाह रहे थे और पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोका था.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरी ने बीबीसी को बताया कि सोमवार को जुलूस के दौरान लाठीचार्ज की अफवाह पर भगदड़ की स्थिति बन गई.

उन्होंने बताया कि कुछ वक़्त के लिए कुछ इलाके में कर्फ्यू लगाया गया जिसे अब हटा लिया गया है.

'हालात नियंत्रण में'

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हमले में आधा दर्जन से ज़्यादा पुलिसवाले घायल हुए हैं.

उन्होंने बताया, "जिस वक्त जुलूस जा रहा था. उसी दौरान दो सांड आपस में भिड़ गए. उसी को लेकर भगदड़ हो गई. जुलूस में कुछ लोगों ने अफवाह फैला दी कि पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया है. इसके बाद लोगों ने पुलिस पर अटैक कर दिया. पुलिस ने कार्रवाई करके उनको वहां से खदेड़ा."

एसएसपी ने बताया, "अराजक तत्वों ने छह से सात वाहन फूंक दिए. सात-आठ पुलिसकर्मियों को चोट आई है. तीस के करीब लोग गिरफ्तार किए गए हैं. अभी स्थिति सामान्य है."

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है.

22 सितम्बर को गंगा में गणेश मूर्ति विसर्जन को रोकने में हुए लाठीचार्ज के विरोध में काशी के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अगुआई में साधुओं ने प्रतिकार रैली निकाली. प्रशासन का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गंगा में मूर्ति विसर्जन नहीं हो सकता था.

एक उच्चाधिकारी के अनुसार आज की रैली को स्थानीय कांग्रेस नेताओं का पूरा समर्थन प्राप्त था.

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