क्या बिहार में कांग्रेस उजड़ चुकी है?

  • 8 अक्तूबर 2015
communal violence in india, number game इमेज कॉपीरइट BBC World Service

कांग्रेस की प्रासंगिकता में गिरावट ज़रूर आई है लेकिन बिहार की राजनीति में उन्हें पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता.

बिहार में कांग्रेस 1990 से ही सत्ता से बाहर है. इस दौरान हुए लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टी एकाध सीटें जीत सकी है.

बावजूद इसके बिहार की राजनीति में कांग्रेस की प्रासंगिकता क़ायम है. अपने सबसे ख़राब दौर में भी कांग्रेस के पास 9 से 10 फ़ीसदी वोट बैंक है.

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इससे अहम बात ये है कि ये 10 फ़ीसदी मतदाता विभिन्न समुदायों के हैं, किसी एक या ख़ास समुदाय के नहीं.

किसी क्षेत्र के चुनावी समीकरण और उम्मीदवार की पहचान को देखते हुए मुस्लिम और दलित मतदाताओं का अच्छा ख़ासा वर्ग कांग्रेस को वोट दे सकता है.

कांग्रेस को किसका समर्थन?

कांग्रेस समर्थक 10 फ़ीसदी मतदाता पार्टी लाइन के आधार पर ही वोट देते हैं.

ये अकेले चुनाव लड़ने पर कांग्रेस को वोट देते हैं और गठबंधन की सूरत में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी को.

यही वजह है कि जेडीयू और राजद जैसे क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार रहते हैं.

सवर्णों के बीच ना तो जेडीयू और ना ही राजद की पकड़ है लेकिन कांग्रेस से गठबंधन के चलते ये सवर्णों का वोट पाने की उम्मीद कर सकते हैं.

यही वजह है कि जेडीयू और राजद ने कांग्रेस को बिहार में 41 सीटें दी हैं.

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