नीतीश 'लोकप्रिय', पर जुटा सकेंगे वोट?

  • 9 अक्तूबर 2015
नीतीश कुमार इमेज कॉपीरइट BBC World Service

बिहार विधानसभा का चुनाव प्रचार अपने चरम पर है. चुनावी पंडित जीत-हार के गुणा-भाग में व्यस्त हैं.

सबसे बड़ा सवाल ये उठाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि क्या महागठबंधन को वोट दिला सकेगी?

कुछ हद तक यह संभव है, लेकिन पूरी तरह से नहीं. इस बात में कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि बिहार के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार सबसे लोकप्रिय विकल्प हैं.

ऐसा इसलिए भी है क्योंकि नीतीश मौजूदा मुख्यमंत्री हैं और बिहार के मतदाताओं में सबसे परिचित चेहरा भी हैं.

पहला चरण में 12 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे.

पहली कड़ीः क्या लालू केवल यादवों के नेता हैं?

लेकिन ये भी सही है कि कुछ मतदाता जो नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं वो जेडीयू-राजद गठबंधन को वोट नहीं भी दे सकते हैं.

हाल के कई सर्वे से ये जाहिर हुआ है कि किसी नेता की निजी लोकप्रियता उन्हें या उनकी पार्टी को उसी अनुपात में वोट नहीं दिला सकती.

2010 के चुनाव में बिहार के 53 फीसदी मतदाता नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते थे, लेकिन उनके गठबंधन को इस अनुपात में मत नहीं मिला था.

दूसरी कड़ीः क्या बिहार में कांग्रेस उजड़ चुकी है?

उस वक्त जेडीयू-बीजेपी गठबंधन को कुल पड़े मतों का 39 फ़ीसदी मत मिला था. 26 फीसदी मतदाता लालू प्रसाद को बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर पसंद कर रहे थे, लेकिन उनकी पार्टी को महज 19 फ़ीसदी वोट मिले थे.

जेडीयू-राजद गठबंधन को इस बात की भी चिंता करनी होगी कि हाल के समय में नीतीश कुमार की लोकप्रियता का ग्राफ़ गिरा है.

ऐसे में तय है कि उनके नाम पर कम लोग गठबंधन को वोट देंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार