खाना चखने के लिए डॉक्टर 'गिनी पिग' नहीं

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मुंबई के जे जे अस्पताल में इलाज के दौरान, शीना बोरा हत्याकांड की मुख्य अभियुक्त इंद्राणी मुखर्जी को दिए गए खाने को चखने की घटना को लेकर अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर्स अपमानित महसूस कर रहे है.

यही नहीं बाक़ी डॉक्टरों ने भी इस घटना की निंदा की है. इस घटना को लेकर कई डॉक्टर सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं.

जे जे अस्पताल के डीन डॉ तात्याराव लहाने ने इस बात को स्वीकार किया है कि ऐसा किया गया था लेकिन उन्होंने कहा कि इसके लिए किसी के साथ ज़बरदस्ती नहीं की गई थी.

पुणे स्थित एक स्त्री रोग चिकित्सक ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर बताया, “यह बिलकुल ही निंदनीय घटना है. डॉक्टर कोई गिनी पिग नहीं है जिस पर जो चाहा प्रयोग किया. यदि कारागार अधिकारियों को इंद्राणी के जान की इतनी ही परवाह थी, तो अपने किसी अधिकारी को खाना चखने को कहते. डॉक्टर मरीज़ों के इलाज के लिए होते हैं इस तरह के प्रयोग करने के लिए नहीं.”

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एसोसिएशन ऑफ़ मेडिकल कंसल्टेंट्स, मुंबई के वरिष्ठ सदस्य तथा जाने-माने मेडिको लीगल सलाहकार डॉ ललित कपूर ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए यह मामला राज्य मानवाधिकार आयोग तक ले जाने की तैयारी कर ली है.

'घिनौनी घटना'

बीबीसी से बातचीत में डॉ कपूर ने कहा, “यह एक घिनौनी घटना है. जिसमें एक अभियुक्त की जान को डॉक्टर की जान से ज़्यादा महत्त्व दिया गया है. यह उस रेजिडेंट मेडिकल ऑफ़िसर के मानवाधिकार का हनन है. इसके ख़िलाफ़ हमारी एसोसिएशन राज्य मानवाधिकार आयोग से शिकायत करने वाली है.”

उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में ऐसी घटनाएँ होती थी जिसमें राजा महाराजाओं की जान का ख़तरा टालने के लिए किसी नौकर या पालतू जानवर को पहले खाना खिलाया जाता था.

डॉ कपूर ने कहा, “यह सरासर ग़लत है और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए”.

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जे जे अस्पताल के डीन डॉ तात्याराव लहाने ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “अस्पताल में दाख़िल अति-विशिष्ट व्यक्तियों को दिए जाने वाले खाने को चखने की अस्पताल की कार्यपद्धती है. इसमें हमारे रेजिडेंट मेडिकल ऑफ़िसर्स माहिर हैं. इंद्राणी मुख़र्जी के विषय में, उनकी जान को ख़तरे की आशंका के चलते कारागार अधिकारियों के निर्देश पर उन्हें दिया जानेवाला खाना चखा गया था. इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने किसी के साथ ज़बरदस्ती नहीं की थी.”

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