नेताओं की मत सुनो, मेरी भी नहीं: मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि छोटे-बड़े नेता अपने स्वार्थ के लिए ऊटपटांग बयानबाज़ी करते हैं, लोगों को उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए.

बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान नवादा में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "आप राजनेताओं की बात मत सुनिए, ख़ुद नरेंद्र मोदी कहता है तो उसकी बात भी मत सुनिए. सुनना है तो देश के राष्ट्रपति ने कल (बुधवार को) जो बात कही है उसे सुनिए."

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बुधवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा था, ''हम अपनी सभ्यता के आधारभूत मूल्यों को खोने नहीं दे सकते... हमारे आधारभूत मूल्य हैं कि हमने हमेशा विविधता को स्वीकार किया है, सहनशीलता और अखंडता की वकालत की है.''

राष्ट्रपति का मार्गदर्शन

मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने जो कहा है उससे बड़ा कोई मार्गदर्शन नहीं हो सकता है, उससे बड़ा कोई विचार, दिशा नहीं हो सकती है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति ने जो रास्ता दिखाया है हमें उसी पर चलना होगा तभी दुनिया भारत से जो अपेक्षा कर रही है वह पूरी की जा सकेगी.

मोदी के इस बयान को कुछ ही दिन पहले उत्तर प्रदेश के दादरी में मोहम्मद अख़लाक़ की हत्या से जोड़कर देखा जा रहा है.

छोटी-छोटी बातों पर सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया देने वाले मोदी ने दादरी की घटना के बारे में अभी तक कुछ नहीं बोला है. विपक्षी दलों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता भी ये सवाल कर रहे हैं कि आख़िर मोदी ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी है.

मोदी ने नवादा में भी दादरी की घटना का नाम लिए बग़ैर इशारों-इशारों में राष्ट्रपति के बयान के हवाले से अपनी बता कहीं.

उन्होंने कहा कि देश को एक रहना है. मोदी ने कहा कि एकता और सद्भावना, भाईचारा, शांति यही देश को आगे ले जाएंगे.

लेकिन कांग्रेस ने इसे ख़ारिज कर दिया है. पार्टी नेता राशिद अलवी ने एक भारतीय न्यूज़ चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि ये उनकी दोहरी चाल है. एक तरफ़ वो इस तरह की बातें करते हैं और दूसरी तरफ़ उनकी ही पार्टी के मंत्री और नेता भड़काऊ बयान देते रहते हैं.

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