आसान नहीं कश्मीर में महिला पत्रकार होना

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Image caption रज़िया जान

जब 32 वर्ष की रज़िया जान ने पत्रकारिता में क़दम रखा और दफ़्तर पहुंचीं तो न्यूज़रूम में खड़े पुरुष पत्रकारों ने उनसे पूछा, "कोई औऱ काम नहीं मिला जो यहां चली आई?"

भारत प्रशासित कश्मीर में पली-बढ़ीं रज़िया तभी समझ गईं कि पत्रकारिता का सफ़र मुश्किलों भरा होगा पर उन्होंने ठान लिया था कि ‘ज़िंदगी में कुछ अलग करना है.’

कश्मीर में महिला पत्रकारों की तादाद बहुत ही कम है. पूरी घाटी में 20 के क़रीब महिला पत्रकार हैं.

रज़िया के परिवार में आज तक किसी ने पत्रकारिता का काम नहीं किया है. रज़िया को अब मीडिया संस्थान में काम करते हुए नौ साल हो गए हैं.

रज़िया कहती हैं, "इस बात में कोई शक नहीं कि कश्मीर में एक औरत के लिए पत्रकारिता करना मुश्किल है. समाज हो या फिर यहां के हालात, हर जगह औरत के लिए चुनौती है. समाज में महिला के पत्रकार होने पर उठने वाले सवालों का आप को जवाब भी देना पड़ता है."

वह कहती हैं, "कश्मीर में एक महिला पत्रकार होकर जब आप को सुरक्षा एजेंसियों के साथ अपने काम के हवाले से संपर्क बनाना पड़ता है तो लोग आप को शक की नज़र से देखते हैं."

शादी करना भी आसान नहीं

रज़िया ने अब तक शादी नहीं की है. वो कहती हैं, "एक महिला पत्रकार के लिए कश्मीर में शादी करना भी कोई आसान बात नहीं है."

उनका कहना है, "शादी की बात आने पर जब लड़के वाले ये सुनते हैं कि लड़की पत्रकार है तो वो हाथ पीछे खींच लेते हैं."

उन्होंने बताया, "इस क़िस्म की सोच को बदलने की ज़रूरत है. आख़िर एक लड़की पत्रकारिता करते हुए जीवन में आगे क्यों नहीं जा सकती?

तलाक़ का कारण

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Image caption फ़रज़ाना

वहीं 33 वर्षीया फ़रज़ाना पीछले 12 साल से पत्रकारिता की दुनिया में हैं. फ़रज़ाना इस समय अपना एक अंग्रेज़ी अख़बार 'कश्मीर न्यूज़' चला रही हैं, जिसकी वो संपादक हैं.

इससे पहले वह कई टेलीविज़न चैनलों के साथ काम कर चुकी हैं. फ़रज़ाना का पांच साल पहले तलाक़ हुआ और उनका कहना है कि इसका 50 प्रतिशत कारण मीडिया के साथ जुड़े रहना बना.

अपना पक्ष रखते हुए वो कहती हैं, "शादी के बाद मेरे पति ने पहले मुझसे कहा कि मैं नौकरी करूं, लेकिन कुछ ही समय के बाद उन्होंने कहा कि मीडिया की नौकरी नहीं करनी है."

उन्होंने बताया, "ज़्यादातर परिवारों में पति मानते हैं कि मीडिया में मर्दों के साथ ज़्यादा संबंध रखना पड़ता है. मैं पत्रकारिता छोड़ना नहीं चाहती थी, जिसके बाद आख़िर तलाक़ पर बात आ गई."

फ़रज़ाना को भी इस बात से शिकायत है कि जब कश्मीर में एक महिला, पत्रकार के रूप में सामने आती हैं तो लोग उसे अजीब नज़रों से देखते हैं.

अच्छा आग़ाज़

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Image caption ज़ीनत ज़ीशान फ़ाज़ली

30 वर्षीया ज़ीनत ज़ीशान फ़ाज़ली पीछले नौ वर्षों से अंग्रेज़ी पत्रकारिता कर रही हैं.

'कश्मीर इमेजेज़' नाम के अख़बार में काम कर रहीं ज़ीनत के परिवार में कई लोग मीडिया से जुड़े हैं.

ज़ीनत भी इस बात को मानती हैं कि कश्मीर में महिला पत्रकार के लिए कई मुश्किलें हैं.

हालांकि वो खुश हैं कि कश्मीर में महिलाएं पत्रकारिता की दुनिया में आगे आ रही हैं और वो इसे एक अच्छा आगाज़ मानती हैं.

ज़ीनत कहती हैं, "आज से 10 वर्ष पहले बहुत ही कम महिलाएं कश्मीर में पत्रकारिता करती थीं. लेकिन अब महिलाएं पत्रकारिता में आगे आ रही हैं, अब सोच बदल गई है."

वो कहती हैं, "जब मैं नौ साल पहले इस मैदान में आई थी तो हम दो या तीन महिला पत्रकार ही थीं. जबकि आज ये तादाद 10 से ऊपर हो गई है."

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