'पाकिस्तान पर अटल की रणनीति अपनाएं मोदी'

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पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी ने मुंबई में कहा है कि पाकिस्तान को ये एहसास हो गया है कि आधुनिक लोकतंत्र में नॉन-स्टेट एक्टर्स की कोई जगह नहीं है.

सरकारों की परोक्ष रज़ामंदी के साथ दूसरे देशों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने वालों को आम तौर पर नॉन-स्टेट एक्टर्स कहा जाता है.

कसूरी ने ये विचार अपनी किताब - 'नीदर ए हॉक नॉर ए डव' के मंबई में विमोचन के बाद व्यक्त किए हैं.

इस दौरान स्तंभकार-लेखक एजी नूरानी, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और वरिष्ठ पत्रकार दिलीप पडगांवकर मौजूद रहे.

अटल के नक़्शे क़दम पर चलें मोदी

कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की रणनीति अपनाने की सलाह दी.

उन्होंने कहा, "मोदी को लेकर पाकिस्तान में कई ग़लतफ़हमियां हैं. उन्होंने कहा, "वो ज़ीरो से उठकर प्रधानमंत्री बने हैं. मुशर्रफ़ और वाजपेयी ने बंटवारे को देखा और स्टेट्समेन बने."

उन्होंने आगे कहा, "मुझे उम्मीद है कि मोदी भी इस बात को समझेंगे कि भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सुधारने की दिशा में वाजपेयी की रणनीति ही सही रणनीति थी."

'जिन्ना मुंबई आना चाहते थे'

इससे पहले इस कार्यक्रम का विरोध कर रही शिवसेना ने आयोजक सुधींद्र कुलकर्णी के मुंह पर सोमवार सुबह कालिख पोत दी थी. सुधींद्र कुलकर्णी कार्यक्रम में अपना सिर मुंडाकर पहुँचे.

कुलकर्णी ने कार्यक्रम रद्द करने से इनकार कर दिया और शाम में कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि मुंबई असहमति और विविधता का सम्मान करती है.

अपने भाषण में कुलकर्णी ने कहा, "मुंबई पाकिस्तान के क़ायदे आज़म जिन्ना और महात्मा गांधी की कर्मभूमि थी. जिन्ना ने एक बार कहा था कि वो वापस मुंबई आना चाहते हैं."

शिवसेना के विरोध के कारण इस दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था का इंतेज़ाम किया गए हैं.

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Image caption शिवसेना कार्यकर्ताओं ने कुलकर्णी के चेहरे पर कालिख़ पोत दी.

'इतिहास का कत्ल'

कसूरी ने अपने भाषण में सबसे पहले अपनी सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस का शुक्रिया किया.

उन्होंने भारत और पाकिस्तान के मौजूदा हालात पर अपने विचार रखे.

नेहरू और जिन्ना के रिश्तों की एक घटना बताते हुए उन्होंने कहा कि अधिकतर लोग नहीं जानते कि उस समय के नेताओं ने इस तरह के विभाजन की कभी कल्पना ही नहीं की थी.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दोनों ही देशों में इतिहास का क़त्ल किया गया.

उनका कहना था कि इस किताब को लिखने का उनका उद्देश्य कुछ ग़लतफ़हमियों को दूर करना है.

Image caption कसूरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने चरमपंथियों के ख़िलाफ़ बड़ा सैन्य अभियान चलाया है.

नॉन स्टेट एक्टर की भूमिका नहीं

उन्होंने कहा, "मैंने किताब के भारत में विमोचन से एक महीना पहले इसकी कॉपी भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लाल कृष्ण आडवाणी, भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, भारत के राजदूत समेत कई लोगों को भेजी."

उन्होंने कहा कि आधुनिक लोकतंत्र में 'नॉन स्टेट एक्टर' की कोई जगह नहीं है.

उन्होंने कहा कि इसी बात को समझते हुए पाकिस्तानी सेना ने क़बालाई इलाक़ों में चरमपंथ के ख़िलाफ़ एक बड़ा अभियान शुरू किया है.

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Image caption भारत पाकिस्तान सीमा पर अक़्सर तनाव रहता है.

शांति वार्ता

यूरोप के प्रवासी संकट पर कसूरी ने कहा, "यूरोप बीस हज़ार प्रवासी लेने पर होहल्ला कर रहा है जबकि अफ़ग़ानिस्तान पर रूस के हमले के दौरान पाकिस्तान ने पैंतालीस लाख अफ़ग़ान नागरिकों को शरण दी थी. उनमें से आधे अभी भी पाकिस्तान में रहते हैं और अधिकतर ने पाक नागरिकता ले ली है."

दोनों देशों के बीच अटकी हुई शांति वार्ता के मुद्दे पर कसूरी ने कहा, "भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों को संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्तता पर विश्वास नहीं है तो एक-दूसरे देश के अहम नागरिकों को मध्यस्त बनाकर वार्ता होनी चाहिए. रास्ता निकल सकता है."

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