'मोदी से हिंदू शरणार्थियों को फ़ायदा नहीं'

भारत में पाकिस्तानी शरणार्थी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भले ही पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदुओं को नागरिकता देने की वकालत करती आई हो. लेकिन उसकी सरकार ने पहले की तुलना में कम शरणार्थियों को नागरिकता दी है.

भारत ने 2011 में बांग्लादेश से आए 54 शरणार्थियों को नागरिकता दी थी, जिनमें हिंदुओं की तादाद ज़्यादा थी. यह संख्या 2014 में घट कर 24 हो गई. इस साल पिछले महीने तक केवल 10 बांग्लादेशियों को भारत की नागरिकता मिली.

पिछले हफ़्ते पाकिस्तान के हैदराबाद से 71 पाकिस्तानी हिन्दू पनाह लेने के लिए दिल्ली आए. यह सिलसिला पिछले पांच साल से जारी है.

हालांकि सरकार का दावा है कि उसने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आए हुए हिंदू शरणार्थियों को लंबे समय तक के लिए वीज़ा देने के नियमों में सुधार करने की कोशिश की है.

अगस्त 2015 से अब लॉंग टर्म वीज़ा (एलचीवी) के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया जा सकता है. गृहमंत्रालय ने इन आवेदनों को जल्दी निपटाने और उन्हें नागरिकता देने के लिए एक टास्क फ़ोर्स का भी गठन किया है.

'कम लोगों को नागरिकता मिली'

बीबीसी हिंदी की ओर से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब से पता चलता है कि नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद भारत में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी हिंदुओं को मिलने वाली नागरिकता में लगातार कमी आ रही है.

भारत सरकार ने आरटीआई की अर्ज़ी के जवाब में कहा कि 2011 से इस साल सितंबर तक 1,403 पाकिस्तानी नागरिकों को नागरिकता दी गई. इनमें ज़्यादातर लोग हिंदू थे और पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत आए थे.

Image caption भारत में म्यांमार से आई रोहिंग्या शरणार्थी किशोरी.

गृह मंत्रालय के मुताबिक़, साल 2011 में 301 पाकिस्तानी हिंदुओं को नागरिकता दी गई थी. यह संख्या 2014 में घट कर 267 हो गई. इस साल सितंबर तक 178 पाकिस्तानी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है.

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद से आए अर्जुन का मानना है कि भारत में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से उन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा है.

दिल्ली में पाकिस्तानी शरणार्थी

उन्होंने बीबीसी से कहा, "साल 2011 में क़रीब 11-12 सौ लोगों ने नागरिकता के लिए अर्ज़ी दी थी. लेकिन अब तक किसी को नागरिकता नहीं मिली है."

सीमा पार हिंदुओं की स्थिति पर वो कहते हैं, "तालिबान और कट्टर मुस्लिम संगठनों के डर से भारत आने वाले पाकिस्तानी हिंदुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. पिछले हफ़्ते 71 पाकिस्तानी हिंदू सिंध से दिल्ली आए. वे इस समय दिल्ली के आदर्श नगर के एक मैदान में खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं."

अर्जुन के मुताबिक़, "लोग केवल मोदी, मोदी करते रहते हैं. लेकिन सब एक ही जैसे हैं. हमें मोदी से कोई मदद नहीं मिली है."

सरकार को भारत में पनाह लेने वाले पाकिस्तानी हिंदुओं की सही संख्या नहीं मालूम. पर अर्जुन का कहना है कि नागरिकता के लिए अर्ज़ी देने वालों और नागरिकता पाने वालों की तादाद में बहुत बड़ा फ़ासला है. उनके मुताबिक़ बहुत कम लोगों को नागरिकता दी जाती है.

भारत में दो लाख शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में पिछले साल शरण चाहने वालों की संख्या क़रीब दो लाख थी.

इनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश के अलावा अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, म्यांमार और अफ़्रीकी देशों के लोगों की संख्या सबसे अधिक थी. अफ़ग़ानिस्तान से आने वाल लोगों में हिंदू और सिखों की संख्या ज़्यादा है.

भारत सरकार ने पिछले पांच साल में अफ़ग़ानिस्तान से आये 630 लोगों को नागरिकता दी है. शरणार्थियों में हज़ारों ऐसे लोग भी हैं जिन्हें 'स्टेटलेस कहा जाता है. ये वे लोग हैं, जिनके पास किसी देश की नागरिकता नहीं होती है. भारत ने बीते पांच साल में ऐसे 1992 लोगों को नागरकिता दी है.

निकाले गए बांग्लादेशी शरणार्थी

ऐतिहासिक रूप से देशों के लोग पनाह मांगने भारत आते रहे हैं और उन्हें अकसर पनाह मिली भी है. इसके बावजूद भारत में अवैध आप्रवासी भी भारी संख्या में रह रहे हैं.

गृह मंत्रालय के अनुसार, साल 2012 तक ऐसे लोगों की संख्या 71,000 से अधिक थी. लेकिन इनमें वही लोग शामिल हैं, जो वीज़ा की मुद्दत ख़त्म होने के बाद अपने देश वापस नहीं गए. इस श्रेणी में बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक सब से अधिक हैं.

Image caption भारत में रोहिंग्या महिला शरणार्थी

भारत सरकार अवैध आप्रवासी शहरियों को देश से निकालने का काम भी करती रहती है. लेकिन इसमें इसे अधिक सफलता नहीं मिली है. गृह मंत्रालय के मुताबिक़, साल 2009 से 2011 तक भारत ने 2,200 अवैध आप्रवासी बांग्लादेशियों को देश से निकाला.

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