पाकिस्तानियों का भारत पर बरसना कितना सही?

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Image caption भारत में मुसलमान पूरी आज़ादी के साथ अपनी इबादतगाहों में जाते हैं.

भारत में बीफ़ का मुद्दा हो या अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों का मामला, इनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं पढ़ने को मिल रही हैं.

मैं काफ़ी दिनों से ये प्रतिक्रियाएं ध्यान से पढ़ रहा हूँ. इनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमान आगे-आगे हैं. पाकिस्तानियों को शायद हिन्दू और हिंदुत्व में कोई फ़र्क़ मालूम नहीं लेकिन वे बढ़-चढ़कर टीका टिप्पणी कर रहे हैं.

एक पाकिस्तानी महिला फेसबुक पर लिखती हैं, "भारत में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों में सरकार शामिल हैं, भारतीय सरकार स्टेट टेररिज़्म कर रही है."

इन बयानों को लाइक करने वाले भी सभी पाकिस्तानी हैं.

सोशल मीडिया पर सक्रिय बांग्लादेशी और पाकिस्तानी, ऐसा लगता है कि खूब चुटकी ले रहे हैं.

बांग्लादेश के एक पत्रकार ने लिखा भारत 'रेप कैपिटल ऑफ़ द वर्ल्ड' के बाद अब 'हिन्दू कट्टरपंथियों का गढ़' भी बन गया है.

हिंसक बन रहा देश

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इसमें कोई शक़ नहीं कि पिछले कई महीनों से भारत में कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं जिससे विदेश में भारत की बदनामी हुई है.

मेरे कई विदेशी दोस्त कहते हैं कि भारत असहिष्णु और हिंसक लोगों का देश बनता जा रहा है.

ये बात मैं भी मानता हूँ कि कुछ कट्टरपंथी तत्व देश को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

यहाँ तक कि भारत प्रेमी विदेशी भी मोदी भक्तों को लेखक सलमान रुश्दी की तरह 'मोदीज़ टोडीज़' (मोदी के चमचे) कहकर चुटकी ले रहे हैं. लेकिन मैं एक भारतीय मुसलमान की हैसियत से पाकिस्तानी और बांग्लादेशी आलोचकों को एक छोटा सा मशवरा देना चाहता हूँ, पहले अपने गिरेबान में झाँक कर देखिए, फिर भारत में हो रही घटनाओं पर टिप्पणी करिए.

आपबीती

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हम सालों से ये जानते हैं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों पर क्या बीत रही है.

मैं कुछ साल पहले वॉशिंगटन में एक ईसाई से मिला था जो पाकिस्तान से फरार होकर अमरीका में पनाह लेने आया था. उसका कहना था 'मसीही' पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं हैं. उनके ख़िलाफ़ क़ुरान का अपमान करने का झूठा इलज़ाम लगा कर उन्हें जेल भेज दिया जाता है.

अहमदिया तबक़े को, जिसे क़ानूनी तौर पर ग़ैर मुस्लिम घोषित किया गया है, कई झूठे मुक़दमों में फंसाकर जेल भेजा जाता है. पाकिस्तान की स्थापना इस्लाम धर्म के नाम पर हुई थी लेकिन वहां मुसलमान ख़ुद मुसलमान को मार रहा है.

हम आए दिन सुनते रहते हैं कि किस तरह से शिया समुदाय की मस्जिदों में सुन्नी जिहादी हमले होते रहते हैं. सिंध प्रांत में पाकिस्तानी हिन्दू मुसलमानों की धार्मिक धांधली का ज़माने से शिकार हैं.

पिछले दिनों मैं दिल्ली में पनाह लेने वाले कुछ पाकिस्तानी हिंदुओं से मिला, उनकी आम शिकायत थी कि उन्हें वहां मज़हबी आज़ादी नहीं.

उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक समझा जाता है. उन्हें मंदिर छिपकर जाना पड़ता है.

झूठे इल्ज़ाम

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मैं पाकिस्तानी आलोचकों से कहना चाहता हूँ कि भारत के मुसलमान खुलेआम मस्जिदों में नमाज़ पढ़ने जाते हैं, बल्कि जुमे के दिन कई मस्जिदों में सड़कों पर नमाज़ी उमड़ आते हैं.

यहाँ रोज़ मस्जिदें बन रही हैं. मैं 20 साल पहले एक नामी चरमपंथी शेख उमर सईद से मिला था जो भारत में आतंक फैलाने आया था. वो पाकिस्तानी मूल का ब्रितानी मुस्लिम था जो बाद में अमरीकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के इल्ज़ाम में जेल गया.

उसने मुझ से कहा था कि उसे बताया गया था कि भारत में मुसलमान असुरक्षित हैं, उन्हें नमाज़ पढ़ने की आज़ादी नहीं, मस्जिद बनाने की आज़ादी नहीं. अपने मिशन में निकलने से पहले वो एक महीने दिल्ली के जामा मस्जिद इलाक़े में रहा था.

उसने मुझसे स्वीकार किया कि उसे भारत में मुसलमान मज़हबी तौर पर पूरी तरह से आज़ाद नज़र आए. पाकिस्तान में मुल्लाओं ने हमेशा ये अफ़वाह फैलाई है कि भारत में मुसलमान बेचारे परेशान हैं, ग़रीब हैं और उन्हें कोई मज़हबी आज़ादी नहीं, अब यही काम सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी नागरिक कर रहे हैं.

स्थिति बेहतर

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Image caption भारत में होने वाले चुनावों में मुसलमान समुदाय बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है.

मैं बांग्लादेश में रह चुका हूँ. वहां के हिन्दुओं से मिला हूँ. वहां के हिन्दुओं का आम जीवन पाकिस्तान के हिन्दुओं के मुक़ाबले बेहतर है लेकिन ये भी अपनी जगह सही है कि सामाजिक स्तर पर उन्हें इशारों में सालों से बताया गया है कि देश मुसलमानों का है. बांग्लादेशी हिन्दुओं को कुछ इस तरह का पैग़ाम दिया जाता है: 'तुम हिन्दू हो, देश में रहो, पूजा करो लेकिन ये मत भूलो कि तुम एक मुस्लिम देश में रह रहे हो'.

शायद संघ परिवार भी भारत के मुसलमानों को यही पैग़ाम देना चाहता है. भारत में सांस्कृतिक सामाजिक विविधता की जड़ें मज़बूत हैं.

इस पर प्रहार करके भारत को पाकिस्तान और बांग्लादेश के रास्ते पर ले जाने की कोशिश ज़रूर कर रहे हैं लेकिन उनके सबसे बड़े आलोचक खुद भारत के हिंदू हैं.

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