गोमांस मुद्दे पर अब गेंद सरकार के पाले में

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Image caption गोमांस को प्रतिबंधित करने के जम्मू हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर की गई थी याचिका.

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने कहा है कि गोमांस पर प्रतिबंध के मुद्दे पर राज्य सरकार ख़ुद ही फ़ैसला ले.

इस मसले पर राज्य के राजनीतिक दलों में अलग-अलग राय सामने आई है.

अदालत ने अपने फ़ैसले में ये कहा कि सभी धर्मों के जज़्बात का ख़्याल रखा जाना ज़रूरी है.

जम्मू हाई कोर्ट ने नौ सितंबर के अपने आदेश में गोमांस की बिक्री और कारोबार पर प्रतिबंध को लागू करन के लिए कहा था.

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Image caption गोमांस पर फ़ैसला अब मुफ़्ती मोहम्मद सईद की सरकार को लेना है.

श्रीनगर हाई कोर्ट में क़ानून के एक सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर ने एक याचिका दायर कर रणबीर पेनल कोड की धारा 298(A) और 298 (B)की संवैधानिकता को चुनौती दी.

राजनीतिक पहलू

बीजेपी के महासचिव अशोक कौल ने बीबीसी हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद बीबीसी से कहा, "हम अदालत के फ़ैसले का सम्मान करते हैं और इसे स्वीकार करते हैं, इससे ज़्यादा अभी कुछ नहीं कहेंगे."

वही राज्य में सत्ता पर क़ाबिज़ और बीजेपी की सहयोगी पिपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के प्रवक्ता डॉक्टर महबूब बेग बताते हैं, "इस मामले के क़ानूनी पहलू से कहीं ज़्यादा अहम राजनीतिक, सामाजिक और किफ़ायती पहलू हैं. पूरे भारत में जम्मू-कश्मीर अकेला मुस्लिम राज्य है और यहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं. इस बात का भी ख़्याल रखा जाए कि बहुसंख्यकों की किसी बात से अल्पसंख्यकों को ठेस न पहुँचे. सहमति फ़ैसले से ज़्यादा अहम है और हम सहमति बना सकते हैं."

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Image caption जम्मू कश्मीर में बीफ़ पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ प्रदर्शन भी हुए हैं.

क़ानून ख़त्म किया जाए

विपक्ष नेशनल कांफ्रेंस ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और महासचिव डॉक्टर मुस्तफ़ा कमाल कहते हैं, "अदालत ने अपने फ़ैसले के ज़रिए गोमांस के मुद्दे को सुलझाने का रास्ता साफ़ कर दिया है और समय आया है कि इस क़ानून को ख़त्म किया जाए. अदालत का फ़ैसला इस क़ानून को ख़त्म करने का रास्ता साफ़ करेगा और सरकार को बहुमत की बात माननी होगी."

हालांकि निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद अदालत के फ़ैसले से सहमत नहीं है. वो कहते हैं, "ना ही अदालत और ना ही विधानसभा इस मामले में हस्तक्षेप करें , क्योंकि ये धार्मिक मुद्दा है. अदालत ने तो अपना फ़ैसला सुनाकर अपना दामन बचाया है गेंद अब मुख्यमंत्री मुफ़्ती के पाले में है. बेहतर है कि विधानसभा में प्रस्ताव पास किया जाए कि जिसको जो खाना है खा ले."

Image caption निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद से बीफ़ मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मारपीट की गई थी.

आम लोग ख़ुश

कश्मीर घाटी के आम नागरिक हाई कोर्ट के इस फ़ैसले से खुश हैं. श्रीनगर के रहने वाले अहमद चिकन कहते हैं, "यह एक अच्छा फ़ैसला है जिस से इस मसले का हल निकल सकता है. देखना यह है कि क़ानून बनाने वाले इस पर क्या फ़ैसला लेते हैं."

ग़ौर तलब है कि गोमांस की पाबंदी के ख़िलाफ़ नेशनल कांफ्रेंस , निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के विधायक यूसफ़ तारीगामी ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किए थे जिन्हें विधानसभा में चर्चा के दौरान शामिल नहीं किया गया.

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