पंजाब: अमृतसर-जलंधर में अर्धसैनिक बल तैनात

पंजाब में बंद इमेज कॉपीरइट Ravinder Robin

पंजाब में सिखों के धार्मिक ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब के अपमान की घटना को लेकर लोगों का ग़ुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है.

सोमवार को सिख प्रदर्शनकारियों ने पंजाब के कई शहरों में अपना ग़ुस्सा ज़ाहिर किया.

पुलिस के पुख़्ता सुरक्षा प्रबंधों के बीच भी प्रदर्शनों के कारण जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा.

हालात को देखते हुए प्रशासन ने अमृतसर और जलंधर में अर्धसैनिक बलों को बुला लिया है.

इमेज कॉपीरइट Ravinder Robin
Image caption अमृतसर में बंद का असर नज़र आया.

इस बीच, अमृतसर के पुलिस कमिश्नर जितेंद्र सिंह औलख ने बताया कि इस दौरान अमृतसर में 52 लोगों को एहतियातन गिरफ़्तार किया गया है.

पुलिस ने लोगों से अफ़वाहों पर ध्यान न देकर शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील भी की है.

उधर, सोशल मीडिया पर की गई बंद की एक अपील पर अमृतसर पूरी तरह बंद रहा है.

इमेज कॉपीरइट Ravinder Robin

जगह-जगह पर सिख प्रदर्शनकारियों ने शहर में कुछ खुली दुकानों को ज़बरदस्ती बंद करवाया.

उधर, लुधियाना में पुलिस ने कहा है कि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के आरोप में एक महिला को गिरफ़्तार किया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है.

पंजाब के शहर संगरूर में भी सिखों ने एक सप्ताह तक रोज़ाना तीन घंटे राजमार्ग जाम करने का एलान किया है.

इमेज कॉपीरइट Ravinder Robin

रिपोर्टों के मुताबिक़ कई स्थानों पर पुलिस और सिख प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुई हैं.

प्रदर्शनों के साथ-साथ सिख फ़ेडेरेशन और शिरोमणि कमेटी के नेता इस्तीफ़े भी दे रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट Ravinder Singh Robin

अमृतसर से कांग्रेस सांसद और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि जो हो रहा है उसके लिए बादल सरकार ज़िम्मेदार है.

आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने भी सिखों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा की है.

इमेज कॉपीरइट Ravinder Singh Robin

उन्होंने पंजाब में सरकार को भंग कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की और कहा कि आम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की वरिष्ठ सदस्य किरनजोत कौर का कहना है कि पंजाब सरकार पीड़ितों को न्याय देने में विफल रही है.

उन्होंने कहा कि पंजाब ख़तरनाक़ मोड़ पर है और इस पर तत्काल ध्यान देकर हालात को सुधारने की ज़रूरत है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार