'जहां बदसलूकी और धमकियां स्वीकार्य हैं'

  • 21 अक्तूबर 2015
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Image caption ऑस्ट्रेलियाई पर्यटक मैथ्यू का कहना है कि उनके साथ इसी रेस्त्रां में बदसलूकी हुई

बेंगलुरू में हिंदू देवी का टैटू अपने पैर पर बनवाने वाले ऑस्ट्रेलियाई युवक से कुछ लोगों ने बदसलूकी थी जिसके बाद उन्होंने माफ़ीनामा लिखकर दिया था.

पुलिस के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलियाई युवक ने अपने स्थानीय दोस्त के कहने पर माफ़ीनामा लिखा था.

बेंगलुरू के पुलिस कमिश्नर एन एस मेघरिक ने बीबीसी हिंदी को बताया, "ऑस्ट्रेलियाई पर्यटक से माफ़ी लिखवाने में पुलिस की कोई भूमिका नहीं थी. उसने अपने एक स्थानीय दोस्त के कहने पर माफ़ी मांगी थी."

ऑस्ट्रेलियाई पर्यटक मैथ्यू गॉर्डन और उनकी गर्लफ्रेन्ड एमिली से शनिवार को एक रेस्टॉरेन्ट में कुछ लोगों ने इसलिए बदसलूकी की क्योंकि गॉर्डन के पैर पर देवी येलेमा का टैटू बना हुआ था.

दोनों से कथित तौर पर बदसलूकी करने वाले रमेश यादव भाजपा के जाने-माने कार्यकर्ता बताए जाते हैं.

हालांकि भाजपा ने कहा है कि उसका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है.

यादव ने स्थानीय मीडिया में ये दावा किया था कि उन्होंने गॉर्डन को सिर्फ़ शरीर के उस हिस्से को ढंकने के लिए कहा था जिस पर टैटू बना हुआ था क्योंकि इससे स्थानीय लोगों की भावानएं आहत हो सकती हैं.

मेघरिक ने कहा, "इसके बाद विवाद शुरू हो गया. जब पुलिस को घटना स्थल से ख़बर मिली तो मामला सुलझाने के लिए तुरंत इन लोगों को पुलिस स्टेशन ले आए."

पुलिस के मुताबिक़ चूंकि कोई शिकायत नहीं मिली है इसलिए पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकी है.

बेंगलुरु छोड़ने से पहले गॉर्डन ने अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा था, "अशोक नगर पुलिस स्टेशन छोड़ने से पहले मुझे ज़बरदस्ती माफ़ीनामा लिखा पड़ा. मुझे अपनी त्वचा पर जो है उसके लिए माफ़ी नहीं मांगनी चाहिए थी और जहां बदसलूकी, धमकियां और भीड़ के हमले स्पष्ट रूप से स्वीकार्य हैं वहां मुझे परेशान करने वाली स्थिति में नहीं होना चाहिए था."

उन्होंने लिखा है, "सहिष्णुता, समझदारी और ग़ैरबराबरी हमारे जीवन का हिस्सा हैं. मैं भारत और हिंदूत्व का पूरी आदर करता हूं. इसलिए मैंने 35 घंटे बैठकर अपनी पीठ पर गणेश का बहुत बड़ा टैटू बनवाया और चार घंटों तक भारत की सबसे निचले तबक़े की देवी येलेमा का टैटू अपने शरीर पर वहां बनवाया जहां जगह बची थी. मेरी आध्यात्मिक यात्रा का फ़ैसला मैं करूंगा कि वो मेरे शरीर पर चित्रों के ज़रिए हो."

"मुझे शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए था और मुझे अपना और अपनी गर्लफ्रेन्ड का बचाव रोज़ करना पड़ता था. उनके साथ यौन शोषण से भरा शारीरिक या मौखिक व्यवहार नहीं होना चाहिए. हम सबके लिए बराबरी और सहिष्णुता का समर्थन करते हैं, ख़ास तौर पर इस देश की महिलाओं के लिए. कृपया अन्याय के ख़िलाफ़ अपराधों के बारे में जागरूकता फैलाने में हमारा समर्थन कीजिए. "

दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के दूतावास ने अपने नागरिकों को स्थानीय परंपराओं पर शोध और उनका आदर करने की हिदायत दी है.

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