कॉल ड्रॉपः जुर्माने के बाद भी सुधरेंगी कंपनियां?

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भारत की दूरसंचार क्रांति का एक नकारात्मक पहलू भी है. मोबाइल संचार के लिए हवा की तरंगों (एयर वेव्स) के आवंटन और कीमत को लेकर एक के बाद एक घोटालों के बाद अब बार-बार कॉल ड्रॉप के रूप में ख़राब सेवा से नए विवाद शुरू हो गए हैं.

आज देश के ज़्यादातर शहरी क्षेत्रों में इंसानों से ज़्यादा फ़ोन हैं. 125 करोड़ लोगों के देश में 100 करोड़ सिम कार्ड हैं, 70 करोड़ मोबाइल फ़ोन हैं जिनमें से 25 करोड़ 'स्मार्ट' फ़ोन हैं.

दिक्कत फ़ोन में नहीं बल्कि मोबाइल सेवा में है. ऐसा एक से ज़्यादा बार हो रहा है कि यूज़र की बातचीत पूरी नहीं हो पा रही है.

और ऐसे उपभोक्ता जिनका प्रति सेकेंड की दर से बिल नहीं आता उन्हें यह ज़्यादा भारी पड़ रहा है क्योंकि उन्हें अपनी बात कहने के लिए बार-बार फ़ोन करने पड़ रहे हैं.

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टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (ट्राई) के अनुसार कॉल ड्रॉप का अर्थ है, "सेवा प्रदाता उस कॉल को बनाए रखने में नाकाम रहा है जो ठीक से कनेक्ट हो गई है."

इसमें आगे कहा गया है, "कॉल ड्रॉप का अर्थ है ऐसी वॉयस कॉल, जिसके एक बार अच्छी तरह से कनेक्ट होने के बाद, सामान्य ढंग से पूरी होने से पहले ही बाधा आ जाए. इसके पहले ही कट जाने की वजह सेवा प्रदाता के नेटवर्क में ही है."

लेकिन मोबाइल फ़ोन से कॉल 'ड्रॉप' क्यों हो जाती है? सरकार में शामिल कई लोगों के साथ ही टेलीकॉम कंपनियां मानती हैं कि यह इसलिए है कि टेलीकॉम कंपनियों ने ज़रूरी आधारभूत ढांचा (टावरों समेत) नहीं तैयार किया और फ़ायदे को बढ़ाने में लगी रहीं.

उनका मानना है कि कॉल ड्रॉप की वजह ऑपरेटरों का इस्तेमाल बढ़ाने के इरादे से जानबूझकर सिग्नल को कम करना है.

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दूसरी ओर कंपनियों के प्रवक्ताओं का दावा है कि वॉयस कॉल ले जाने वाले इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक स्पैक्ट्रम या एयरवेव्स की कमी की वजह से नेटवर्क जाम हो रहे हैं. उनका कहना है कि इस समस्या का समाधान तभी हो सकता है जब सरकार और स्पैक्ट्रम आवंटित करे.

कंपनियों का दावा है कनेक्टिविटी इसलिए भी कमज़ोर हुई है क्योंकि स्थानीय प्रशासन ने ग़ैरकानूनी बताकर बहुत से टॉवर को बंद कर दिया है. इसके अलावा स्थानीय निवासी भी इस डर से टॉवर लगाने का विरोध कर रहे हैं कि इनसे ख़तरनाक रेडिएशन निकलता है जिससे कैंसर हो सकता है.

साफ़ है कि टेलीकॉम कंपनियों का तर्क बहुत से लोगों को हजम नहीं हुआ. यह मुद्दा 24 अगस्त के बाद चर्चा में इसलिए भी आया क्योंकि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्देश दिए कि इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाया जाए ताकि आम आदमी को होने वाली तकलीफ़ दूर की जा सके.

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सरकार को इसके बाद जल्द हरकत में आना था. चार सितंबर को ट्राई ने 'कॉल ड्रॉप होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को हर्जाना दिए जाने' पर एक परामर्श पत्र जारी किया.

इसमें इस बात का उल्लेख किया गया कि कैसे आम भारतीयों में सेलफ़ोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है और अगर टेलीकॉम कंपनियां अपने नेटवर्क को अपग्रेड नहीं करतीं तो सेवा की गुणवत्ता गिरेगी ही और उपभोक्ताओं की उम्मीद के अनुरूप नहीं रहेगी.

18 अक्टूबर को ट्राई ने कई नियम लागू करने का ऐलान किया और टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए 1 जनवरी, 2016 से हर कॉल ड्रॉप पर एक रुपया उपभोक्ता को देना अनिवार्य कर दिया लेकिन इसे एक दिन में अधिकतम तीन कॉलों तक सीमित रखा.

सरकार के अनुसार, टेलीकॉम ऑपरेटर्स बढ़ती उपभोक्ताओं की संख्या के अनुपात में आधारभूत ढांचे को बनाए रखने में नाकाम रहे हैं, ख़ासकर दिल्ली और मुंबई में.

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नए नियमों के अनुसार, टेलीकॉम ऑपरेटरों पर कॉल ड्रॉप समेत सेवा की ख़राब गुणवत्ता के लिए जुर्माना बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया गया है. यह जुर्माना तब लगेगा जब ऑपरेटर लगातार दो या ज़्यादा तिमाही में सेवा की गुणवत्ता के मानक को पूरा नहीं कर पाता.

इसमें कहा गया, "अथॉरिटी को लगता है कि ये कदम लंबे समय से लंबित लापरवाही को रोकने के लिए पर्याप्त होंगे और एक निश्चित समय-सीमा में सेवा की गुणवत्ता बढ़ाएंगे."

हालांकि नए नियम समस्या को शायद ट्राई की उम्मीद के मुताबिक दूर न सकें. इन्हें लागू करना तकनीकी और कानूनी दोनों तरह से मुश्किल होगा.

ऐसे संकेत हैं उद्योग संगठन इन नियमों को चुनौती देंगे, पहले तो दूरसंचार विवाद निपटारा और अपीली न्यायाधिकरण (टीडीसेट) में और फिर हाईकोर्ट में.

भारती एयरटेल, आइडिया सेलुलर जैसी प्रमुख कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (सीओएआई) ने कहा है कि अगर ट्राई उसकी चिंताओं की परवाह नहीं करता है तो वह 'कानूनी रास्ता' अपनाएगा.

चूंकि कॉल ड्रॉप होने और उसके लिए उपभोक्ता को हर्जाना देने के मामले में दो ऑपरेटर शामिल होंगे, इसलिए इस पर विवाद होना तय है कि कौन सा नेटवर्क फ़ेल हुआ और इसके लिए आरोप-प्रत्यारोप चलते रहेंगे.

इसके अलावा नए नियमों से कंपनियों के बीच और कंपनियों और उपभोक्ताओं के बीच टकराव होना भी तय है.

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