फ़रीदाबाद दलित हत्याकांड: घिरी मोदी सरकार

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हरियाणा में दलित बच्चों की हत्या के मामले में विपक्ष केंद्र सरकार पर तीखे वार कर रही है तो सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई दिखती है.

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र सरकार को सीधा-सीधा 'दलित विरोधी' कहा, भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी जीतन राम मांझी ने एक मंत्री के बयान को सामंती मानसिकता बुलाया है.

वहीं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि नेताओं को बोलते समय सजग रहना चाहिए.

इसे केंद्रीय राज्य मंत्री वीके सिंह को नसीहत के तौर पर देखा जा सकता है जिन्होंने गुरुवार को इस मामले को कुत्ते को पत्थर मारने जैसा बता दिया था.

शुक्रवार की सुबह-सुबह उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बयान दिया कि केंद्र सरकार का रवैया दलित विरोधी है और दलितों का हर स्तर पर शोषण हो रहा है.

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हरियाणा की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर फ़रीदाबाद में दलितों के घर इसलिए नहीं गए कि उन्हें या उनकी सरकार को दलितों से कोई संवेदना है बल्कि इसलिए गए क्योंकि उन्हें बिहार में दलितों के वोटों के बिदकने का डर है.

इस समय बिहार में चुनाव हो रहे हैं और कुछ लोगों का मानना है कि दलित विरोधी घटनाएं वोटरों के मन में शंका पैदा कर सकती हैं.

मायावती ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा "जब केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार थी तब कभी राहुल गांधी ने हरियाणा के शोषित दलितों का सुध नहीं ली."

राहुल गांधी चंद दिनों पहले वहां गए थे.

फ़रीदाबाद मामले पर पूछे गए एक सवाल पर वीके सिंह ने कहा था, "अगर कोई कुत्ते को पत्थर मार दे तो इसके लिए सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है."

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और अब भाजपा के सहयोगी जीतन राम मांझी ने कहा कि वीके सिंह का बयान उनकी सामंती मानसिकता दर्शाता है.

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वहीं आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा, "प्रधानमंत्री का मुंह नहीं खुल रहा है. वीके सिंह ने कहा कि कुत्तों को पत्थर फेंका जाए तो पीएम का दोष नहीं है. उन्हें चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए."

जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि वीके सिंह का बयान उनकी जातीय मासकिता से ग्रसित है.

उधर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "हमारी पार्टी सत्ता में है. हमारे नेताओं को ज़्यादा सजग रहने की ज़रूरत है. ऐसे वाक्यों का चयन करना चाहिए जिनकी ग़लत व्याख्या की गुंजाइश शेष न बचे."

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