गीता की तरह कराची का रमज़ान घर जा पाएगा?

गीता
Image caption गीता के पाकिस्तान से भारत लौटने पर पाकिस्तान के रमज़ान की भी लौटने की उम्मीद बंधी है

गीता की पाकिस्तान से भारत वापसी के बाद पिछले, दो सालों से भोपाल में रह रहे 15 साल के पाकिस्तानी बच्चे रमज़ान के लिये भी उम्मीद बंधी है.

रमज़ान इस वक़्त ग़ैर सरकारी संस्था ‘आरंभ’ के बाल गृह में रह रहा है और जल्द कराची जा पाने की आस लगाए बैठा है.

रमज़ान कराची का रहने वाला है. रमज़ान के पिता कुछ साल पहले उसे पाकिस्तान से बांग्लादेश ले गए थे.

रमज़ान के मुताबिक बांग्लादेश पहुँचकर उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली और. रमज़ान के अनुसार सौतेली मां से परेशान होकर, उसने बांग्लादेश की सीमा पार की और भारत पहुंच गया.

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Image caption रमज़ान फिलहाल भोपाल के बालगृह में रह रहा है

उसके बाद वो अलग अलग जगहों पर रहकर भोपाल आ गया. रेलवे स्टेशन पर घूमते हुए वो ग़ैर सरकारी संस्था 'आरंभ' के दफ्तर पहुंच गया.

'आरंभ' की निदेशक अर्चना सहाय बताती हैं, "रमज़ान के मुद्दे पर हमारी बात पाकिस्तानी समाजसेवी अंसार बर्नी से हो रही है. वो इस संबंध में काग़ज़ात इकठ्ठा कर रहे हैं और उन्होंने काफी काग़ज़ात हमें भेजे हैं जिनसे रमज़ान को पाकिस्तान भेजने का काम आसान हो सके."

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Image caption दो साल पहले रमज़ान अपने पिता से बिछड़ गया था

अर्चना सहाय कहती हैं, "भारत सरकार ने रमज़ान से संबंधित फाइल को फिर से खोला है. अगर प्रदेश सरकार भी इसमें रुचि ले तो ये काम जल्दी हो सकता है. जिन दस्तावेज़ों की ज़रूरत है वो सरकारी स्तर पर मिलने आसान हैं. अब तक हम ही अपनी कोशिशें करते रहे हैं."

अक्तूबर 2013 में भोपाल पहुँचे रमज़ान का अब तक ठिकाना आरंभ का बालगृह ही रहा है.

रमज़ान ने बीबीसी को बताया, “मुझे मेरी सौतेली मां बहुत सताती थी. इसी वजह से मैं घर से भाग गया और ग़लती से भारत आ गया. मुझे यहां बहुत अच्छे से रखा गया है.”

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Image caption अंसार बर्नी ने इधी फ़ाउंडेशन के साथ गीता का मामला भी उठाया था

लेकिन रमज़ान से संबंधित कोई भी दस्तावेज़ इस संस्था के पास न होने कारण उसे वापस भेजने की तमाम कोशिशें नाकाम रही हैं.

पाकिस्तान के मानवधिकार कार्यक्रता अंसार बर्नी भी इसी कोशिश में जुटे हैं कि रमज़ान को उसकी मां से मिलाया जा सके.

अंसार बर्नी ने रमज़ान के नाना-नानी से संबंधित कुछ काग़ज़ात भारतीय अधिकारियों को भेजे हैं.

अर्चना सहाय ने बताया, “हमने उसे उसके परिवार के पास भेजने के लिये काफी कोशिश की. विदेश मंत्रालय को पहले लिखे पत्रों से कोई ज़्यादा सहयोग नहीं मिला. इसके बाद पाकिस्तानी दूतावास को भी जानकारी भेजी. अब उम्मीद कर रहे हैं कि कुछ रास्ता निकलेगा."

रमज़ान को अब यह उम्मीद है कि वो जल्द ही अपनी मां के पास पहुंच जाएगा.

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