'प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस का लाठीचार्ज'

दिल्ली पुलिस

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नॉन नेट फेलोशिप बंद करने का विरोध कर रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए बल प्रयोग किया.

'ऑक्युपाइ यूजीसी' के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इसे केंद्र सरकार का 'हमला' बताया है.

छात्र नेताओं का आरोप है कि पुलिस के लाठीचार्ज में प्रदर्शन कर रहे कई छात्र घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया है.

वहीं पुलिस ने छात्रों के आरोप को गलत बताते हुए कहा है कि 'प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ रहे थे और महिला पुलिस कर्मियों से बदसलूकी कर रहे थे'.

छात्र नेता प्रिंस ने बीबीसी को बताया कि वे यूजीसी के फेलोशिप बंद करने के फैसले के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और उनका विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था. लेकिन उन पर दिल्ली पुलिस ने सुनियोजित तरीके से लाठी चार्ज किया.

प्रिंस ने कहा "हमारी लड़ाई सत्ता के खिलाफ थी. केंद्र सरकार ने ये हमला करवाया है. बहुत से छात्र इसमें घायल हो गए."

घायल छात्रों ने अपनी तस्वीरें सोशल नेटवर्क साइट पर भी पोस्ट की हैं.

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छात्र नेताओं का आरोप है कि कुछ छात्रों ने मोबाइल फोन पर इस लाठीचार्ज का वीडियो बनाया था उनके मोबाइल पुलिस ने जबरन तोड़ दिए हैं.

प्रिंस के मुताबिक, "लगभग चालीस छात्र हिरासत में हैं और उनमें भी घायल छात्र हैं. हिरासत में लिए गए छात्रों में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नेता भी शामिल हैं".

पुलिस इस बात से साफ इंकार कर रही है.

डीसीपी सेंट्रल आलोक कुमार ने बीबीसी को बताया, "छात्र पुलिस के लगाए बैरिकेड तोड़ रहे थे और महिला पुलिस कर्मियों से बदसलूकी कर रहे थे इसलिए उन्हें हिरासत में लिया गया, गिरफ्तार नहीं किया गया".

छात्र नेता सनी ने कहा कि यूजीसी ने पीएचडी और एमफिल छात्रों की स्कॉलरशिप बंद करने का एकतरफा फैसला लिया है. अगर ये स्कॉलरशिप बंद कर दी जाती हैं तो देश में शोध करना बहुत मुश्किल हो जाएगा.

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