बदायूं मामलाः सीबीआई की रिपोर्ट ख़ारिज

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Image caption बदायूं में वो पेड़ जहां लड़कियां लटकी हुई पाई गई थीं

बदायूं में हुए दो बहनों के गैंगरेप और हत्या के मामले में प्रिवेंशन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ओफ्फेंसस (पोक्सो) कोर्ट ने सीबीआई की क्लोज़र रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है.

साथ ही कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त पप्पू यादव को पेश होने का आदेश दिया है.

दोनों लड़कियों के परिजनों के वकील कोकब हसन नक़वी ने बताया कि कोर्ट ने फैसले का मुख्य भाग पढ़ कर सुनाया. पूरा फैसला आने में दो-तीन दिन लग सकते हैं.

दोनों लड़कियों के भाई धीरेन्द्र ने कहा कि उन्हें अदालत से ही न्याय की उम्मीद थी और वह मिल गया है.

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Image caption घटनास्थल पर इकट्ठा हुई भीड़- फाइल फोटो

धीरेन्द्र ने बीबीसी से कहा, "सीबीआई तो आरोपियों को बचाने के लिए पूरी कोशिश कर रही थी. उसी के चलते हमारे घरवालों को कितना परेशान किया, क्या बताएं."

27 मई, 2014 को बदायूं में हुए दो चचेरी बहनों के गैंग रेप और हत्या के मामले को सीबीआई ने अपनी क्लोज़र रिपोर्ट में आत्महत्या का मामला बताया था. साथ ही कहा था कि दोनों लड़कियों के रेप की पुष्टि नहीं हुई है.

उत्तर प्रदेश के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक एएल बनर्जी ने 8 जून को एक प्रेस वार्ता में कहा था कि दो में से एक लड़की के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई है. घटना के बाद हुए पोस्टमॉर्टेम की रिपोर्ट में भी बलात्कार बताया गया था.

कोकब नक़वी ने भी पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई की रिपोर्ट को चुनौती दी थी. उन्होंने कहा कि सीबीआई ने उनके गवाहों के बयान भी गलत लिखे थे.

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मामला मुलायम सिंह के भतीजे, बदायूं से सांसद धर्मेन्द्र यादव के क्षेत्र का था. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मीडिया को लताड़ा था कि वह प्रदेश सरकार की छवि धूमिल करने के लिए इस केस को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहा है.

सीबीआई के संदिग्धों को क्लीनचिट देने के बाद मुख्यमंत्री ने इस बात को कई बार दोहराया कि मीडिया गलत रिपोर्टिंग करता है.

गैंग रेप और हत्याओं के इस मामले का संज्ञान लेते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी उत्तर प्रदेश की स्थिति पर चिंता जताई थी.

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