गाजर का पराठा, इन्सुलिन और अमित शाह

  • 29 अक्तूबर 2015
अमित शाह इमेज कॉपीरइट AFP

सुबह के साढ़े आठ बजे हैं. पटना के प्रतिष्ठित होटल मौर्या के तीसरे फ़्लोर पर लिफ़्ट के सामने तीन ब्लैक कैट कमांडो खड़े हैं.

होटल का वेटर एक मैनेजर की निगरानी में सफ़ेद कपडे से ढकी एक बड़ी ट्रे कमरा नंबर 330 की तरफ़ ले जा रहा है.

पढ़ेंः यूपी की कहानी बिहार में दोहरा सकेंगे शाह?

ये आलीशान कमरा पिछले डेढ़ महीने से भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नाम पर आरक्षित है.

इस कमरे के अग़ल-बग़ल के चार कमरों में से कुछ में अमित शाह के सुरक्षा गार्ड रहते हैं और कुछ में उनका निजी स्टाफ़.

बहरहाल, वेटर जो ट्रे ले जा रहा था उसमें गाजर के पराठे, उपमा और पपीता था जो आमतौर पर अमित शाह का नाश्ता होता है.

अमित शाह को गाजर के पराठे इतने पसंद हैं कि होटल के बावर्चियों को इस मामले में ख़ास हिदायतें मिल चुकी हैं.

हालांकि अमित शाह मधुमेह यानि डायबिटीज़ के मरीज़ हैं, इसलिए गाजर के पराठों या रात के अपने शाकाहारी भोजन से पहले वो इन्सुलिन लेना नहीं भूलते हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP

पिछले क़रीब दो महीने से अमित शाह ने बिहार को अपनी कर्मभूमि बना रखा है. भाजपा विधानसभा चुनाव की बागडोर उन्हीं के हाथों में है.

प्रदेश भर में घूम-घूम कर प्रचार करने के बाद अमित शाह पटना पहुँच कर रणनीति बनाने में लग जाते हैं.

उनके काम करने के दो ख़ास तरीक़े हैं, जो उत्तर प्रदेश में 2014 के आम चुनाव में भी देखने को मिले थे.

पहला ये कि वे पार्टी कार्यालय जाकर काम करने से परहेज़ करते हैं और दूसरा ये कि उनका लोगों से मिलने-जुलने का सिलसिला रात दो बजे तक चलता है.

वैसे शाम के बाद अमित शाह की एक ख़ास डिमांड होती है. एक प्याला खौलती ब्लैक कॉफ़ी. शायद इसलिए कि उन्हें जल्दी नींद न आए.

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी पत्नी सोनल भी एक बार होटल में रह कर गई हैं.

लेकिन भारतीय जनता पार्टी पर अमित शाह की अमिट छाप सिर्फ़ इन्हीं वजहों से नहीं दिखती.

इमेज कॉपीरइट AFP

पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता जब पटना में होते हैं और अमित शाह के होटल में ही रुके होते हैं, तब भी ये गारंटी नहीं है कि अमित शाह से उनकी मुलाक़ात होगी.

दो हफ़्ते पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह मौर्या होटल के दूसरे तल पर कमरा नंबर 201 में रुके थे और अमित शाह का दफ़्तर तीसरे तल से चल रहा था.

लेकिन होटल में भाजपा के इन दोनों दिग्गजों की मुलाक़ात नहीं हुई. कुछ ऐसा ही शहनवाज़ हुसैन के साथ हुआ जब वे भी मौर्या होटल में ही रुके हुए थे.

यानि किससे कब और कहाँ मिलना है, इसका फ़ैसला अमित शाह ही करते हैं.

मिसाल के तौर पर एक हफ़्ते पहले वे होटल से बाहर जाने के लिए निकले और लिफ़्ट के बाहर कुछ पत्रकारों ने उनसे कुछ सवाल पूछने चाहे.

अमित शाह ने गाड़ी में बैठने से पहले जवाब दिया, "मैं रास्तों और रोड पर इंटरव्यू नहीं देता." इसके बाद वो मुस्कुराते हुए चुनाव प्रचार पर निकल गए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार