क्या अमरीका की लड़कियां ग़रीब हैं?

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भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाख़िल कर कहा है कि उसका इरादा विदेशियों के लिए किराए की कोख का कारोबार बंद करने का है.

अब तक निःसंतान विदेशी दंपति भारत आकर किराए की कोख के लिए भारतीय महिलाओं को पैसे देते थे. ये सरोगेट माँएं उनके बच्चों को जन्म देती थीं.

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस कारोबार की आड़ में ग़रीब दलित और विदेशी महिलाओं का शोषण होता है.

किराए की कोख पर लगेगी रोक

बीबीसी संवाददाता अनुराग शर्मा ने भारत के सबसे बड़े सरोगेसी क्लिनिक में से एक गुजरात के आणंद के आकांक्षा इनफ़र्टिलिटी क्लिनिक की डॉक्टर नयना पटेल से पूछा कि वो सरकार के इस क़दम को कैसे देखती हैं.

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यह एक पीछे ले जाने वाला क़दम है. मुझे उम्मीद है कि सरकार एक बार फिर अपने इस क़दम पर विचार करेगी.

यह बिल सार्वजनिक बहस के लिए वेबसाइट पर पड़ा है, इसलिए इस बारे में कोई भी फ़ैसला सार्वजनिक बहस के बाद ही लेना चाहिए.

इस फ़ैसले के बाद मेडिकल टूरिज़्म और मेक इन इंडिया जैसे नारों का क्या होगा.

हम इस संबंध में रेगुलेशन की बात कर सकते हैं लेकिन प्रतिबंध की बात करना जवाब नहीं है.

अव्वल तो शोषण का जो तर्क है वो ग़लत है. सरोगेसी के अनुबंध के तहत दो व्यस्क महिलाओं के बीच सोच-समझ कर अनुबंध होता है. इसलिए शोषण की तो कोई बात ही नहीं है.

एक को पैसा चाहिए और दूसरे को बच्चा.

अमरीका में जहां सबसे ज़्यादा सरोगेसी के मामले होते हैं, वो अमरीकी महिलाओं के लिए नहीं बल्कि यूरोपीय जोड़ों के लिए होता है तो क्या अमरीका एक ग़रीब मुल्क है?

क्या वहां की लड़कियां ग़रीब है? क्या अमरीका की लड़कियों का शोषण होता है?

दुनिया का सबसे ताक़तवर और नंबर एक देश जब सरोगेसी को अपना सकता है तो हम क्यों नहीं?

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फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में सरोगेसी ज़रूर प्रतिबंधित है. लेकिन जर्मनी का संविधान वेश्यावृत्ति को क़ानूनी मान्यता देता है तो क्या भारत भी वेश्यावृत्ति को क़ानूनी मान्यता देगा?

हम पश्चिम का अनुसरण क्यों कर रहे हैं? हमें अमरीका का अनुसरण करना चाहिए.

जो कहता है कि हम चाहते हैं कि दुनिया की सभी निःसंतान दंपत्तियों के पास बच्चे हों. हमारी सारी औरतें सरोगेट हो जाएं.

और ये अमरीका को आर्थिक लाभ पहुंचाएगा.

विदेशी लोग जो यहां से बच्चा पा कर जाते हैं वे सरोगेट माँओं की बहुत इज़्ज़त करते हैं. वो अपने बच्चों का राम और कृष्णा जैसे भारतीय नाम रखते हैं.

वे यहां से सरोगेट को अपने परिवार का सदस्य बना कर जाते हैं.

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