न विधायक, न सपा नेता, पर यूपी में मंत्री

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उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया है.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 12 नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया है. नौ को अधिक ज़िम्मेदारी सौंपी गई है.

दो दिन पहले अखिलेश यादव ने पांच वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों - अम्बिका चौधरी, राजा महेंद्र अरिदमन सिंह, नारद राय, शिवाकांत ओझा, और शिव कुमार बेरिया को हटा दिया था.

उनकी जगह फिलहाल अरविन्द सिंह गोप, कमाल अख्तर, विनोद कुमार सिंह उर्फ़ पंडित सिंह को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया गया है.

राज्य सभा में समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल के लड़के नितिन अग्रवाल को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार का दर्जा दिया गया है.

छह अन्य विधायकों को भी राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार मिला है. ये सभी पहले राज्य मंत्री थे.

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Image caption अरविंद सिंह गोप को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है.

नए मंत्रियों में बलवंत सिंह रामूवालिया भी हैं जो न तो विधायक हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य.

पूर्व में वे दो बार अकाली दल से सांसद और केंद्र में मंत्री रह चुके हैं. इनकी मुख्य योग्यता मुलायम सिंह यादव से दोस्ती बताई जाती है.

उनका नाम सपा के फाइनेंसरों में गिना जाता है.

बलवंत सिंह रामूवालिया अकाली दल के यूपी प्रभारी भी थे और फ़िलहाल ग़ा़ज़ियाबाद में रहते हैं.

2011 में उन्होंने लोक भलाई नाम की पार्टी बनाई थी लेकिन बाद में उसका विलय अकाली दल में हो गया.

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Image caption रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया फिलहाल बिना मंत्रालय के मंत्री हैं.

अखिलेश मंत्रिमंडल में हुए इस फेरबदल को साल 2017 चुनाव से पहले नए चेहरे लाकर नई छवि बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

तबदीली के बाद रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है क्योंकि वो अभी भी बिना किसी मंत्रालय के मंत्री हैं.

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