'2047 तक अल्पसंख्यक हो जाएंगे असमवासी'

  • 3 नवंबर 2015
इमेज कॉपीरइट Dilip Sharma
Image caption उपमन्यु हजारिका

असम से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा पर हो रही घुसपैठ की ज़मीनी जांच-पड़ताल के लिए बने उपमन्यु हजारिका आयोग की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार से जवाब मांगा है.

इस आयोग का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही किया गया था.

आयोग के अध्यक्ष उपमन्यु हजारिका ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि आयोग की रिपोर्ट किसी के राजनीतिक फायदे के लिए नहीं है.

उन्होंने कहा कि देश के लिए घुसपैठ का मुद्दा काफी संवेदनशील है और सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और असम सरकार से जवाब मांगा है.

अगले छह महीने के भीतर ही असम विधानसभा के चुनाव होने हैं. ऐसे में हज़ारिका आयोग की रिपोर्ट पर भाजपा बांग्लादेशी घुसपैठ को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुख मुद्दा बनाना चाहती है.

उधर कांग्रेस ने इस रिपोर्ट को कोई खास अहमियत नहीं दी है.

इमेज कॉपीरइट sunita zade

उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हज़ारिका आयोग की इस रिपोर्ट पर देश भर में चर्चा का आह्वान किया है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ से असम की मूल आबादी के 2047 तक अल्पसंख्यक बन जाने का खतरा है.

उपमन्यु हजारिका ने बताया कि जब वो पिछले मई और जून में भारत-बांलादेश सीमा पर निरीक्षण के लिए गए तो उन्होंने देखा कि बॉर्डर काफी खुला हुआ है.

वो कहते हैं, "भारत-बांलादेश बॉर्डर का एक तिहाई हिस्सा नदी तटवर्ती है. ऐसे में ब्रह्मपुत्र और कई नदियों के बीच मौजूद जलमार्ग वाले इस बॉर्डर पर सुरक्षा गार्डों के लिए निगरानी रखना काफी कठीन कार्य है और इसी रास्ते से घुसपैठ होती है."

उपमन्यु हजारिका ने अपनी रिपोर्ट में कुछ लोगों की स्वतंत्र जांच का भी ज़िक्र किया है जिसमें असम की जनसंख्या के वर्ष 2047 तक अल्पसंख्यक बनने की आशंका जताई गई है.

इमेज कॉपीरइट Dilip Sharma
Image caption असम प्रदेश भाजपा के महासचिव विजय कुमार गुप्ता

असम प्रदेश भाजपा के महासचिव विजय कुमार गुप्ता का कहना है कि असम में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव मे घुसपैठ का यह मुद्दा पार्टी के एजेंडे में शीर्ष पर होगा.

वो कहते हैं, "इससे गंभीर बात कुछ नहीं हो सकती कि जब भारतीय नागरिकों के लिए अपने ही देश में अल्पसंख्यक होने का खतरा उत्पन्न हो जाए."

हालांकि दूसरी तरफ असम प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता रिपुन बोरा कहते हैं, "आयोग की रिपोर्ट अनुमानित है और ये दुर्भाग्य की बात है कि भाजपा, आरएसएस एक अनुमानित रिपोर्ट को लेकर हल्ला मचा रहे हैं."

इमेज कॉपीरइट Dilip Sharma
Image caption असम प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता रिपून बोरा

उन्होंने आगे कहा, "चुनाव आते ही भाजपा घुसपैठ जैसे मुद्दे को उठाकर हिंदू-मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करना शुरू कर देती है. लेकिन केंद्र में कई बार सत्ता में रह चुकी भाजपा ने इस समस्या के समाधान लिए कुछ भी नही किया."

कोर्ट ने केंद्र और असम सरकार को 5 नंवबर को होने वाली अगली सुनवाई पर इसका जवाब दायर करने का निर्देश दिया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार