'बेटी हूँ, इसलिए बोर्ड में नहीं बैठने देते'

राजश्री पाथी

अगर आपका परिवार सौ सालों से किसी व्यापार में हो, तो हो सकता है कि आप भी आगे चलकर उस व्यापार को संभालें. लेकिन भारतीय उद्योगपति राजश्री पाथी के मामले में ऐसा नहीं है.

उन्होंने 17 साल की उम्र में शादी कर ली थी और एक महिला होने के नाते उनसे उम्मीद भी नहीं थी कि वे अपना पारिवारिक व्यवसाय संभालेंगी.

कोई महिला केवल ग़लती से (किसी पुरुष उत्तराधिकारी के नहीं होने की हालत में) ही यह दायित्व संभाल पाती है और अभी तक यही अवधारणा है कि महिलाएं कोई विशुद्ध व्यवसायिक कंपनी नहीं चला सकतीं.

पाथी का कहना है, "या तो अच्छी तरह से शिक्षित दामाद या रिश्ते का कोई भाई ही व्यवसाय चलाने के लिए और परिवार का नाम आगे बढ़ाने के लिए लाया जाएगा."

अधिकतर भारतीय कंपनियों को परिवार चला रहे हैं. इन कंपनियों ने देश की आधी श्रम शक्ति को अपने यहां काम पर रखा हुआ है और भारतीय अर्थव्यवस्था के दो तिहाई हिस्से पर इनका क़ब्ज़ा है.

लेकिन पाथी उन पहली महिलाओं में से हैं जिन्होंने लिंग आधारित भेदभाव को तोड़ा है और परंपरा को अनसुना किया है.

क़रीब 30 साल पहले अपने पिता की अचानक मृत्यु के बाद उन्हें अपना पारिवारिक व्यवसाय संभालना पड़ा था.

उन्हें पीएसजी नायडू समूह की छठी पीढ़ी के रूप में कई शैक्षिक और परोपकारी संस्थाओं की बागडोर संभालनी थी.

लेकिन वे इस चुनौती लिए तैयार नहीं थीं.

उनका कहना है, "बैंक वाले मेरे पीछे पड़ गए थे. वे कह रहे थे कि आपके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो अब कौन गारंटी लेगा? हमने आपको जो उधार दिया है, उसकी वापसी कौन सुनिश्चित करेगा. हम आपके व्यवसाय को अपने हाथों में ले सकते हैं."

वे पीछे नहीं हटीं. उनकी पहली चुनौती थी अपने पिता के द्वारा शुरू किए गए चीनी मिल को पूरा करना.

सूखे की वजह से उस साल गन्ने का उत्पादन काफी कम हुआ था इसलिए मील मालिक पहले से ही इस समस्या से जूझ रहे थे.

उन्होंने बैंक वालों से ख़ुद को साबित करने और नए चीनी मील को नियंत्रण में लेने के लिए समय मांगा.

इमेज कॉपीरइट

वो कहती हैं, "एक बार जब मैंने इस हालात पर नियंत्रण पा लिया तो मैंने दो कपड़ों का मिल चलाया. मैंने राजश्री चीनी कंपनी को ख़ुद खड़ा किया है. वास्तव में मैंने उसे पूरा किया है और तब से दो और कंपनियां भी खड़ी की है और दो का अधिग्रहण किया है. इसके साथ ही दूसरे व्यवसायों में भी हाथ डाला है."

दशकों में उन्होंने कपड़ों की मिल, रासायनिक उद्योग और शिक्षा से लेकर ऊर्जा तक कई क्षेत्रों में कारोबार खड़ा किया है लेकिन यह इतना आसान भी नहीं था.

उनके माता-पिता से कभी उन्हें यह अहसास नहीं हुआ कि वे बेटे की कमी महसूस करते हैं.

लेकिन आसपास का समाज हमेशा उनपर एक पुरुष उत्तराधिकारी नहीं होने की वजह से तरस खाता रहा.

पाथी का कहना है कि वे हमेशा अपने माता-पिता के सामने साबित करना चाहती थी कि वे किसी बेटे से कम नहीं है.

इमेज कॉपीरइट Getty

उन्होंने बताया कि उनके पिता एक समान अवसर देने में यकीन रखते थे.

उन्होंने कहा, "उन्होंने हमेशा उन दूसरे व्यावसायिक परिवारों के विपरीत जो वंश संभालने के लिए एक अच्छे दामाद की तलाश में रहते हैं, मेरी बहन और मुझे, हमने जो करना चाहा, उसमें प्रोत्साहित किया."

अब समाज में महिलाओं की भूमिका को लेकर काफी बातें की जा रही हैं हालांकि इसमें से ज़्यादातर बातें सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हैं.

और बहुत ही कम बातें काम में महिलाओं की हिस्सेदारी को लेकर हो रही है.

भारत में किसी भी कंपनी के बोर्ड में एक महिला प्रतिनिधि के अनिवार्य रूप से होने का क़ानून बनाया गया है.

तो भी मैककिंसी कंस्लटेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़ किसी परिवार के द्वारा चलाई जा रही कंपनी या दूसरी कंपनियों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर एक फ़ीसदी से कम महिलाएं हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty

पाथी का कहना कि चीजें अब बदल चुकी हैं.

उनका कहना है, "व्यवासायिक परिवार के अंदर ज़्यादातर महिलाएं आज बेटे के नहीं होने की हालत में ही व्यवसाय संभाल रही हैं."

"भारत जैसे बड़े देश में मुट्ठी भर महिलाएं ही उद्योग-धंधा संभाल रही हैं. मैं उन्हें उंगलियों पर गिन सकती हूं."

वो कहती हैं कि बैंकिंग और सूचना तकनीक जैसे सर्विस सेक्टरों में मामला दूसरा हो सकता है लेकिन निर्माण या इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कुछ ही महिलाएं शीर्ष पर हैं.

पाथी देश में चीनी लॉबी और क्षेत्रीय उद्योग की ईकाई की पहली महिला अध्यक्ष भी बनीं.

अपनी कंपनी के बाहर वो इस बात पर अफसोस जाहिर करती है कि समाज अब भी बहुत नहीं बदला है.

उन्होंने कहा, "मेरे अपने पारिवारिक व्यवसाय में मुझे ट्रस्टी के बोर्ड में बैठने की इजाज़त नहीं है क्योंकि मैं एक बेटी हूं. मुझे उसमें हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं है. इसलिए यह अब भी एक सामंती समाज है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार