'भूकंप के बाद नेपाल से एक लाख लोग भारत आए'

  • 9 नवंबर 2015
मानव तस्करी इमेज कॉपीरइट HOANG DINH NAMAFPGetty

पिछले अप्रैल महीने में आए विनाशकारी भूकंप के बाद लगभग एक लाख से ज़्यादा लोग नेपाल से भारत आ गए हैं.

इनमे ज़्यादातर लोग तो रोज़गार की तलाश में आये, लेकिन उन लोगों की संख्या भी काफ़ी है जिन्हें मानव तस्करों के गिरोहों ने अपना शिकार बनाया है.

मानव तस्करी का शिकार हुए लोगों में ज़्यादातर युवतियां और बच्चे हैं.

यह अनुमान है तस्करी के ख़िलाफ़ नेपाल और भारत में सरकार के साथ मिलकर काम करने वाली एक ग़ैर-सरकारी संस्था 'पैरवी' का.

संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भूकंप के बाद से ही बड़े पैमाने पर नेपाल में युवतियां तस्करी का शिकार हो रही हैं.

'पैरवी' संस्था के दीनबंधु वत्स बताते हैं कि उनका यह अनुमान उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड की सरकार और भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों की रिपोर्टों पर आधारित है.

वो कहते हैं, "पहली ख़बर जो हमारे पास सशस्त्र सीमा बल के हवाले से आई थी उसके हिसाब से बिहार के रक्सौल बार्डर से भूकंप के एक महीने के अंदर ही एक लाख लोग पलायन कर नेपाल से भारत आए."

"उसके बाद उत्तरखंड के बनबासा से भी लोगों के आने की ख़बरें मिलीं. उत्तर प्रदेश के बहराइच की सीमा से भी बड़े पैमाने पर लोग भारत आये. इसमें तस्करी कर लाए जाने वाली लड़कियां और बच्चे भी बड़ी संख्या में थे."

भारत के गृह मंत्रालय के आंकड़े भी काफ़ी चौंका देने वाले हैं. मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि भूकंप के बाद लगभग 159 नेपाली युवतियों और बच्चों को सीमा पर तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया है.

मंत्रालय के अनुसार, भूकंप के बाद से अबतक 46 मामले दर्ज किए गए हैं जबकि 59 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि भूकंप से पहले 2012 और 2014 में मानव तस्करी के सिर्फ़ 8-8 मामले ही दर्ज किये गए थे. 2013 में मानव तस्करी के 13 मामले दर्ज किये गए थे.

हाल ही में दिल्ली हवाई अड्डे पर 24 ऐसी ही नेपाली युवतियों को मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया जो इन्हें दुबई ले जाना चाह रहे थे.

दिल्ली पुलिस के उपायुक्त दिनेश गुप्ता ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि मानव तस्करों के अलावा एयर इंडिया के भी अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया है.

उन्होंने कहा, "यह पूरा संगठित गिरोह जान पड़ता है. हम और भी लोगों को गिरफ़्तार करने वाले हैं. यह बात सच है कि भूकंप बाद मानव तस्करी में बढ़ोतरी हुई है. ऐसा गिरफ़्तार किए गए लोगों के बयान से पता चलता है."

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की देख रेख में चलने वाली हेल्पलाइन में कार्यरत अभिषेक, जिन्होंने कई बार छापामारी कर कई नेपाली युवतियों को बचाने का काम किया है, कहते हैं कि यह पता लगाना बड़ा मुश्किल है कि किसकी तस्करी की जा रही है और कौन स्वेच्छा से जा रहा है.

उनका कहना है कि तस्करी में शामिल गिरोह उन जगहों से नहीं आते जहां सुरक्षा बल तैनात हैं.

इमेज कॉपीरइट BINITA DAHAL

वो कहते हैं, "अब तस्कर उन रास्तों से आ रहे हैं जहां सुरक्षा बल तैनात नहीं हैं. मसलन जंगलों और पहाड़ों के रास्ते. वैसे भी जिनकी तस्करी कर वो लाते हैं वो नेपाल से ही उनके दस्तावेज़ बनवा लेते हैं ताकि किसी क़ानूनी शिकंजे में ना फंसें."

'पैरवी' संस्था के ही अजय झा ने बताया कि कई मामलों में यह भी देखा गया है कि ज़्यादातर तस्कर पीड़ित युवतियों के अपने क़रीब रिश्तेदार ही होते हैं.

विनाशकारी भूकंप के बाद से लेकर आज तक नेपाल के सुदूर अंचलों में रहने वाले ख़ुद को एक बार फिर बटोरने का काम कर रहे हैं. मगर भूकंप ने पहले से ही ग़ुरबत की मार झेल रहे लोगों की रीढ़ की हड्डी ही मानों तोड़ दी हो.

मौजूदा राजनीतिक हालात के बाद लोगों को पलायन के सिवा दूसरा कोई चारा दिखाई नहीं देता.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएिड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार