भड़काऊ भाषण पर सुब्रमण्यम स्वामी के ख़िलाफ़ चलेगा केस

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केंद्र सरकार ने अपनी ही पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण देने के मामले में केस चलने को सही ठहराया है.

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने भड़काऊ भाषण से जुड़ी आईपीसी की धाराओं की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुए उसे ख़त्म करने की मांग की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र को नोटिस जारी कर इस पर सरकार का पक्ष जानना चाहा था.

केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दायर करते हुए कहा है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर लोगों को किसी समुदाय या वर्ग के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. क्योंकि सरकार के अनुसार इससे समाज में अशांति फैलेगी और दंगे भी भड़क सकते हैं.

स्वामी ने हेट स्पीच से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धारा 153, 153ए, 153बी, 295, 295ए, 298 और 505 की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं.

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कानून के अनुसार हेट स्पीच वे भाषण, हाव-भाव, व्यवहार, लेखन या प्रदर्शन हैं जिन पर पाबंदी है क्योंकि इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है और दंगे भड़क सकते हैं, या इससे धर्म, जाति, जन्मस्थान, आवास या भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच नफ़रत को बढ़ावा मिलता है.

केंद्र सरकार ने स्वामी की याचिका को ख़ारिज करने की मांग करते हुए कहा है कि हेट स्पीच से जुड़े दंडात्मक प्रावधान देश की एकता, अखंडता को बनाए रखते हैं और विभाजनकारी ताक़तों पर अंकुश लगाते हैं.

स्वामी के ख़िलाफ़ देश के कई इलाकों में भड़काऊ भाषण देने और दो समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने के आरोप में केस दर्ज हैं.

स्वामी का कहना है कि भड़काऊ भाषण के क़ानूनी प्रावधान दर असल अभिव्यक्ति की आज़ादी के मूल अधिकार का उल्लंघन करते हैं.

लेकिन केंद्र सरकार का मानना है कि नफ़रत फैलाने वालों की मंशा रखने वालों को सज़ा देने के लिए इन प्रावधानों का रहना ज़रूरी है.

सरकार ने स्वामी की लिखी एक किताब को भी हिंदू-मुसलमानों के बीच नफ़रत फैलाने वाली बताया है.

सरकार ने स्वामी के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले जारी रखने की वकालत की है.

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